6 मार्च 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के 100 दिन पूरे हो जाएंगे. उस दिन दिल्ली व दिल्ली सीमाओं के विभिन्न विरोध स्थलों को जोड़ने वाले केएमपी एक्सप्रेस-वे पर 5 घंटे की नाकाबंदी होगी. यह सुबह 11 से शाम 4 बजे के बीच जाम किया जाएगा

हाल में ही सामने आए एक सर्वे में कहा गया है कि कोरोनावायरस को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन के दौर के दौर में महाराष्ट्र में लोगों की कमाई काफी घटी है. फूड राइट्स पर काम करने वाली एक सामाजिक संस्था के सर्वे के मुताबिक लॉकडाउन की अवधि में 96 फ़ीसदी लोगों की आमदनी घट गई थी.लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था अन्न अधिकार अभियान के लिए राज्य की समन्वयक मुक्ता श्रीवास्तव ने यह जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की अवधि में लोगों की आमदनी में कमी आने का मुख्य कारण नौकरियां जाना और काम की उपलब्धता नहीं होना थी. उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण में शामिल हर पांचवें व्यक्ति को भोजन खरीदने के लिए पैसा नहीं होने के कारण भूखे रहने पर मजबूर होना पड़ा. जिन लोगों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया, उनमें से 96 प्रतिशत लोगों की आमदनी में कोरोना संकट की अवधि में कमी आई है. लॉकडाउन हटने के पांच महीने बाद तक उनकी स्थिति ऐसी ही बनी रही. उन्होंने बताया कि जिन लोगों को सर्वे में शामिल किया है, उनमें से 52 फीसदी लोग ग्रामीण इलाके के रहने वाले हैं. सर्वे में शामिल बाकी लोग शहरी इलाकों के रहने वाले हैं. इनमें से 60 प्रतिशत महिलाएं हैं. लॉकडाउन से पहले करीब 70 फीसदी लोगों की मासिक आय 7000 रुपये थी और बाकी की मासिक आय 3000 रुपये थी. उन्होंने कहा, "पहले से ही इतनी कम आय के बाद आमदनी और घटना इस बात का संकेत है कि कोरोना संकट का इन लोगों पर कितना बुरा असर पड़ा है. साथियों लॉकडाउन खत्म होने के बाद क्या अब आपकी कमाई में सुधार हुआ है? क्या रोजगार खो चुके लोगों को फिर से काम मिलना शुरू हो रहा है? कोरोना के बाद अब आपके जीवन में और आजीविका में क्या अंतर आया है? अपनी बात हम तक पहुंचाएं फोन में नम्बर 3 दबाकर.

उज्ज्वला योजना के पोस्टर पर महिलाओं के लिए लिखी ये बातें अब सिर्फ पोस्टर के कागज तक ही सिमट कर रह गई हैं. गैस सिलेंडर को महिलाओं के सम्मान से जोड़ने वाली मोदी सरकार अब इसकी बढ़ती कीमतों पर मौन साधे हुए है. बीजेपी की तेर-तरार नेता स्मृति ईरानी जो यूपीए सरकार के दौरान इन मसलों को लेकर काफी सक्रिय रही थीं और गैस सिलेंडर लेकर धरने पर भी बैठती थीं अब उन्होंने महिला एवं बाल विकास मंत्री बनने के बाद अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली है. आपको बता दें कि सरकारी तेल कंपनियों ने आज यानी 1 मार्च को फिर गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की है. यह बढ़ोतरी सभी कैटेगिरी के सिलेंडर में की गई है. बीते महीने फरवरी में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 3 बार बढ़ाए गए थे. इस साल के शुरुआती दो महीनों में ही अभी अब तक बिना सब्सिडी वाला सिलेंडर 125 रुपये महंगा हुआ है. हालांकि बावजूद इसके सरकार लोगों को अच्छे दिन का सपना दिखाने में मस्त है. ख़बरों के मुताबिक, घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 25 रुपये की बढ़ोतरी की गई है जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 19 रुपये का इजाफा हुआ है. खास बात ये है कि सब्सिडी और बिना सब्सिडी वाले दोनों सिलेंडरों के दाम बढ़े हैं. जिसके बाद आम आदमी और खासकर उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की मुश्किलें ज्यादा बढ़ गई हैं.यानी सरकार ने गैस चूल्ला तो थमा दिया लेकिन सिलेंडर की कीमतें बढ़ाकर उसमें जलने वाली आग बुझा दी. साथियों, आपके क्षेत्र में रसोई गैस के नए दाम क्या हो गए हैं? कीमतों में आए उछाल के कारण आपके रसोईघर का बजट किस तरह प्रभावित हो रहा है? उज्जवला योजना के लाभार्थी क्या नया सिलेंडर खरीदने में सक्षम हैं? अपनी बात हम तक पहुंचाएं फोन में नम्बर 3 दबाकर.

खेती की लागत बढ़ने, जलवायु में बदलाव के चलते होने वाले खतरों से और बाजार की दोषपूर्ण नीतियों से घिरे हुए किसान खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. जो इस संघर्ष में जीत गए वे जी रहे हैं और हारने वालों के पास मौत के अलावा कोई रास्ता नहीं है। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें। 

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बांग्लादेश को छोड़कर भारतीय सबसे ज्यादा काम करते हैं, लेकिन सबसे कम कमाते हैं. ‘ग्लोबल वेज रिपोर्ट 2020-21: वेजेज एंड मिनिमम वेजेज इन द टाइम ऑफ कोविड-19’ के मुताबिक देर तक काम कराने के मामले में भारत दुनिया में पांचवे स्थान पर है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

कोरोना महामारी के दौरान लगभग एक करोड़ प्रवासी मजदूरों को उनके घर लौटने को मज़बूर होना पडा था. इसे ध्यान में रखकर श्रम मंत्रालय उनके लिए काम करने की जगह पर वोट देने के हक के साथ दूसरे अधिकार दिलाने के संबंध में एक नीति तैयार करा रहा है. इसके लिए रिपोर्ट तैयार करने के लिए उसने नीति आयोग से अनुरोध किया है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

लॉकडाउन के बाद से ट्रेनों के परिचालन तो शुरु हो गये है लेकिन अभी भी लंबी दूरी की ट्रेनें ही ज्यादा चल रही है.यात्रियों की परेशानी को देखते हुए पैसेंजर ट्रेन को दोबारा से चलाने का फैसला लिया गया है. यह कई चरणों में चलाई जाएंगी. ट्रेन और स्टेशन पर सामाजिक दूरी बनाए रखने का हवाला देकर यह कदम उठाया जा रहा है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

2020 में करीब 331 मानवाधिकार रक्षकों की हत्या कर दी गई थी. इनमें से दो-तिहाई पर्यावरण, जमीन और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रहे थे. यह जानकारी आज जारी रिपोर्ट ग्लोबल एनालिसिस 2020 में सामने आई है. गौरतलब है कि इन मानवाधिकार रक्षकों में से 6 भारत के भी थे. रिपोर्ट से पता चला है कि इनमें सबसे ज्यादा लोग कोलंबिया के थे जहां 177 लोगों की हत्या कर दी गई थी.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के करीब 87 दिनों के आंदोलन के दौरान 248 किसानों की मौत होने की जानकारी सामने आई है. कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के इकट्ठा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मृतकों में से 202 किसान पंजाब, 36 हरियाणा, छह उत्तर प्रदेश, एक-एक मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तराखंड से हैं। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें। 

आर्थिक सर्वे भारत सरकार की एक सरकारी रिपोर्ट है. हर साल रिपोर्ट सेहतमंद अंग्रेजी में जारी होती है और बीमार हिंदी में भाषा और विचार पूरी तरह से सरकारी होता है। लेकिन इस रिपोर्ट से और भी बहुत से खुलासे होते हैं. भारत सरकार का आर्थिक सर्वे कहता है कि इलाज पर किए जाने वाले खर्च के चलते लोगों की कमर टूट जाती है. भारत में औसतन एक व्यक्ति की जेब से इलाज का 60 फ़ीसदी हिस्सा खर्च होता है। इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।