बिहार राज्य के नालंदा जिला के हिलसा प्रखंड से कुमारी आकांक्षा मोबाइल वाणी के माध्यम से नन्ही कहानी कार्यक्रम के अन्तर्गतएक बच्ची से साक्षात्कार लिया है। जिसमें बच्ची ने एक प्यारी से कविता प्रस्तुत किया है,लाल टमाटर ।

बिहार राज्य के नालंदा जिला के हिलसा प्रखंड से कुमारी आकांक्षा मोबाइल वाणी के माध्यम से नन्ही कहानी कार्यक्रम के अन्तर्गत निशा भारती से साक्षात्कार लिया है। जिसमें निशा भारती ने एक प्यारी से कविता प्रस्तुत किया है,तितली उड़ी

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बिहार राज्य के जिला नालंदा से रिंकू कुमारी , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि मनरेगा के अंतर्गत 90 दिनों का काम होता है। जिनके पास जॉब कार्ड रहता है उन्ही को काम मिलता है। जिसमें से दो सौ अड़सठ रुपये श्रमिकों को और दो सौ तीस रुपये मनरेगा साथी को दिए जाते हैं। मनरेगा का काम उसी स्थिति में दिया जाता है जहां कोई काम नहीं होता है, जिन लोगों के पास लेबर कार्ड नहीं है, वे मनरेगा मेट और रोजगार सेवक द्वारा बनाया गया लेबर कार्ड प्राप्त कर सकते हैं

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...

बिहार राज्य के जिला नालन्दा से रिंकू कुमारी , की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से हमारे श्रोता से हुई , श्रोता बताती है कि सभी लोग प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने के लिए सक्षम नहीं है। सरकारी स्कूल का होना बहुत जरूरी है। किसान और गरीब लोग प्राइवेट में अपने बच्चों को नहीं पढ़ा सकते है। सरकार से सभी तरह की सुविधा लोगों को मिल रहा है।

बिहार राज्य के जिला नालंदा से रिंकू कुमारी ,की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से शीतल कुमारी से हुई। शीतल कुमारी बताती है कि गाँव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है जहाँ गरीबों का अच्छे से इलाज़ होता है। गर्भवती महिलाएं अपना प्रसव अच्छे से करा सकती है। डॉक्टर समय पर आते है और सभी चीज़ों की सुविधा उपलब्ध है।

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिलदेव शर्मा खेती में हरी खाद का इस्तेमाल करने के बारे में जानकारी दे रहे है अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें 

मनरेगा में भ्रष्टाचार किसी से छुपा हुआ नहीं है, जिसका खामियाजा सबसे ज्यादा दलित आदिवासी समुदाय के सरपंचों और प्रधानों को उठाना पड़ता है, क्योंकि पहले तो उन्हें गांव के दबंगो और ऊंची जाती के लोगों से लड़ना पड़ता है, किसी तरह उनसे पार पा भी जाएं तो फिर उन्हें प्रशासनिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस मसले पर आप क्या सोचते हैं? क्या मनरेगा नागरिकों की इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम हो पाएगी?

बचपन मनाओ बढ़ते जाओ और मोइलवाणी की प्रतियोगिता ''चलो पढ़ें और पढ़ाएं'' में हिस्सा ज़रूर लें और परिजन अपने बच्चों को वाक्य पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें | बच्चे नया पढ़ेंगे तो नया सीख भी पाएंगे.