आपका पैसा आपकी ताकत की आज की कड़ी में हम सुनेंगे ऑनलाइन पैमेंट और युपीआई के बारे में।
बिहार राज्य के जिला नालंदा से रिंकू कुमारी , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि गर्मी बहुत बढ़ गई है। इसलिए सरकार अप्रैल में ही गर्मी की छुट्टी देती है, स्कूल को सरकारी स्कूल में गर्मी की छुट्टी मिलती है और स्कूल मई-जून में खुलते हैं। गर्मी में बच्चों को स्कूल नहीं बुलाना चाहिए।
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सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ग्रुप बी और ग्रुप सी कांस्टेबल, एचसी, एएसआई, एसआई के कुल 144 पदों पर काम करने के लिए इच्छुक हैं। वैसे अनुभवी उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त स्कूल या कॉलेज से न्यूनतम 10वी व अधिकतम स्नातक पास किया हो साथ ही पोस्ट से सम्बंधित अनुभव भी होना अनिवार्य है । इसके साथ ही उम्मीदवार की आयु सीमा 18 से 30 वर्ष तक होनी चाहिए । इन पदों पर वेतनमान नियम अनुसार दिया जाएगा।ओबीसी व सामान्य वर्ग के लिए आवेदन शुल्क 247.20 रुपये व अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व महिला उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 47.20 रुपये है, इच्छुक उम्मीदवार अपना आवेदन ऑनलाइन भर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आवेदनकर्ता इस वेबसाइट पर जा सकते हैं। वेबसाइट है https://rectt.bsf.gov.in/ योग्य उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षण के बाद किया जाएगा।
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा किसान भाइयों को जिंक सल्फेट असली है या नकली उसकी पहचान करने की जानकारी दे रहे हैं । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
बिहार राज्य के नालंदा के नगरनौसा से शम्भू प्रसाद ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि बच्चों का गुस्से में बहुत प्रभाव पड़ता है। बच्चो पर गुस्सा करने से उनके मन में यह लग जाएगा की उन्होंने डांट सुना। इसलिए अगर खेल खेल में बच्चे से गलती होती है तो उन्हें प्यार से समझना चाहिए। ऐसे समय में बच्चे अच्छे से सीखेंगे। अगर खेल में सामान टूट गया और उनपर गुस्सा करने से बच्चों में झिझक होगी और आगे भी गलती करने पर झूठ बोलेंगे। इसीलिए प्यार के ही भाषा से बच्चों को समझना चाहिए। शम्भू ने कभी अपने बच्चों को डाँटा नहीं ,हर गलती होने पर माफ़ कर देते है या समझते है। उनके बच्चों की बौद्धिक विकास अच्छी हुई है
भारत में जहां 18वीं लोकसभा के लिए चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों में एक तरफ राजनीतिक दल हैं जो सत्ता में आने के लिए मतदाताओं से उनका जीवन बेहतर बनाने के तमाम वादे कर रहे हैं, दूसरी तरफ मतदाता हैं जिनसे पूछा ही नहीं जा रहा है कि वास्तव में उन्हें क्या चाहिए। राजनीतिक दलों ने भले ही मतदाताओं को उनके हाल पर छोड़ दिया हो लेकिन अलग-अलग समुदायो से आने वाले महिला समूहों ने गांव, जिला और राज्य स्तर पर चुनाव में भाग ले रहे राजनीतिर दलों के साथ साझा करने के लिए घोषणापत्र तैयार किया है। इन समूहों में घुमंतू जनजातियों की महिलाओं से लेकर गन्ना काटने वालों सहित, छोटे सामाजिक और श्रमिक समूह मौजूदा चुनाव लड़ रहे राजनेताओं और पार्टियों के सामने अपनी मांगों का घोषणा पत्र पेश कर रहे हैं। क्या है उनकी मांगे ? जानने के लिए इस ऑडियो को सुने
बिहार राज्य के नालंदा से शम्भू प्रसाद ,मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि मैं कुछ भी कर सकती हूँ कार्यक्रम से पता चला कि अगर एक महिला समाज में बदलाव लाना चाहती है तो किस तरह से बदलाव आता है और एक बेटी कितने घर को संभल सकती है ,इसका अच्छा उदहारण धारावाहिक में मिलता है। कार्यक्रम में अकेले डॉ स्नेहा माथुर ने लोगों को जागरूक किया। समाज में अगर प्रत्येक लोग जागरूक हो और अपना कर्तव्य याद करे तो भारत बदलेगा
बिहार राज्य के नालंदा से शम्भू प्रसाद ,मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि समाज बहुत बदला है लेकिन अब भी महिलाओं का उनके नाम से पहचान नहीं है । 20 से 25 प्रतिशत लोग ही ऐसा करते है। लोगों ,खास कर पुरुषों को जागरूक होना पड़ेगा कि महिलाओं को उनके नाम से पहचान मिले
