बिहार राज्य के नालंदा ज़िला के चंडी प्रखंड के माधवपुरडीह से रूपा ,मोबाइल वाणी के माध्यम से एक महिला से बात कर रही है। ये बताते है कि महिला पुरुष में भेदभाव नहीं होना चाहिए। लड़का हो या लड़की दोनों बराबर है। सभी घर से बाहर निकल सकते है।
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सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
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बिहार राज्य के जिला नालंदा से शम्भू प्रसाद , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि प्रधानमंत्री बीमा योजना, जिसमे केवल बीस रुपये प्रति वर्ष काटी जाती है। इस योजना में आंशिक विकलांगता पर दुर्घटनावश एक लाख और पूर्ण विकलांगता पर दो लाख दिए जाते हैं, तो प्रत्येक व्यक्ति को इसका लाभ उठाना चाहिए और प्रत्येक खाताधारक को इसके लिए बहुत आवश्यक और कटौती योग्य बीमा मिलना चाहिए।
बिहार राज्य के जिला नालंदा से शम्भू प्रसाद , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि सरकार महिलाओं को जमीन देने के लिए कई योजनाएं ला रहे है लेकिन पुरुष उनको जमीन में हिस्सा नहीं देना चाहते है क्योंकि उनको लगता है कि उनकी इज़्ज़त घट जाएगी। महिला और पुरुष दोनों को समान अधिकार देना चाहिए। अगर महिला को जमीन पर अधिकार मिलेगा तो उनको ससुराल और मायके में भी सम्मान मिलेगा। अगर महिला को जमीन पर अधिकार मिलेगा तो समाज विकसित होगा।
बिहार राज्य के जिला नालंदा से शम्भू प्रसाद , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि हर जगह पानी की समस्या हो रही है। सरकार की नल जल योजना के कारण लोगों को पानी मिला है। लेकिन कई जगह पानी का पाइप फटने के कारण पानी दूषित हो रहे है। लोग दूषित पानी पीने को मजबूर है। स्कूलों में भी जल की समस्या के कारण बच्चे बीमार पड़ रहे है।
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा धान की खेती में अजोला की भूमिका के बारे में जानकारी दे रहे हैं। विस्तारपूर्वक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें .
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भारत में भूमि, महिलाओं के सशक्तिकरण और आर्थिक स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण साधन है। परंतु, सदियों से चली आ रही सामाजिक-सांस्कृतिक रूढ़ियों और कानूनी बाधाओं के कारण महिलाओं की भूमि पर अधिकार सीमित रहा है। यह सीमित पहुंच न केवल महिलाओं के व्यक्तिगत विकास को रोकती है, बल्कि समाज के पुरे विकास को भी रोकती करती है। आज भी महिलाओं के पास पुरुषों की तुलना में भूमि पर बहुत कम अधिकार हैं।यह देखते हुए कि महिलाएं बड़े पैमाने पर कृषि कार्य में लगी हुई हैं और अक्सर घरेलू उपभोग के लिए भोजन की प्राथमिक उत्पादक होती हैं। भूमि पर अधिक नियंत्रण के साथ, महिलाएं अधिक पौष्टिक फसलों, अधिक उत्पादक और टिकाऊ प्रथाओं में निवेश कर सकती हैं . तो दोस्तों आप हमें बताइए कि *----- महिलाओं के लिए भूमि अधिकारों तक पहुंच में सुधार के लिए कौन से संसाधन और सहायता प्रणालियां आवश्यक हैं? *----- महिलाओं के लिए भूमि अधिकार को हासिल करने में संसाधनों तक सीमित पहुंच कैसे बाधा बनती है?
