बिहार राज्य के नालंदा जिले से सरिता कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से लोरी सुनाया। लोरी के बोल हैं - अम्मा तेरी आंगन में मैं हूँ कैसी गुड़िया रे.....
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
बिहार राज्य के नालंदा जिले के चंडी से सुनीला देवी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि बच्चे को छे महीने तक माँ का दूध पिलाना चाहिए। छे महीने के बाद ऊपरी आहार देना चाहिए। माता पिता ही बच्चों के शिक्षक होते है। बच्चों को अच्छा माहौल देना चाहिए
हैलो श्वेता , तुम सो रही हो , मेरी आवाज़ मेरी पहचान है , मैं शोहा , कक्षा I , पंचायत , नगर नौ , सब लोक , नालंदा जिले से हूँ , इसलिए आज हम जानते हैं कि बच्चों के बचपन का जश्न कैसे मनाना है । मोबाइल के माध्यम से जो शब्द चलाए जा रहे हैं , वे उनके बच्चे को उनके बोलने के तरीके से व्यवहार करने के लिए प्रेरित करेंगे । कहानियाँ चलाई जा रही हैं जिसमें यह समझा जाता है कि अगर हम उससे छोटे बच्चे से बात करेंगे तो वह भी बच्चे से बात करेगा । हां , अगर हम आपको बताते हैं कि बाबू एक खिलौना है , तो इसे अच्छी तरह से चलाएं , यहां आएं और बैठें और गिनती करें , तो वह समझ जाएगा कि हां , यह एक अच्छी बात है , वह भी । गिनती की तरह पढ़ने से भी दिमाग बढ़ेगा , अब अगर आप उससे गलत बात कहते हैं , तो वह बच्चे के सामने गलत बात सीख जाता है , अगर हम किसी बड़े व्यक्ति को गलत बात बताते हैं । यदि आप इस तरह से बात करते हैं , तो बच्चे भी सीखते हैं कि आप बड़े व्यक्ति का सम्मान नहीं करते हैं । और अगर हम , एक बड़े आदमी को , अपने बड़े पुरुषों में कोई जाति या पंथ नहीं देखना चाहिए , तो हमें अच्छी तरह से बोलना चाहिए ताकि हमारे बच्चे भी उसी तरह सीख सकें ।
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
बिहार राज्य के नालंदा ज़िला से शम्भू प्रसाद ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि आजकल अधिकारी चुनाव में सेटिंग कर देते है। आजकल ईवीएम से चुनाव हो रहा है पर ईवीएम द्वारा भी धोखा हो रही है। आजकल कुछ भी संभव है। नोटा के माध्यम से भी बहुत जालसाजी हो रही है।इसमें अधिकारी ही पहले शामिल है
बिहार राज्य के नालंदा जिला के नगरनौसा ब्लॉक से प्रियंका कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि उन्हें बचपन मनाओ बड़ाहट जाओ कार्यक्रम सुनकर बहुत ही अच्छा लगा है। और इससे हमें सिख मिलती है कि छोटे बच्चों को डांटना नहीं चाहिए। जब बच्चे का उम्र तीन वर्ष का हो तो उसे आगनबाड़ी में भेजना चाहिए साथ अगर बच्चे का उम्र 6 वर्ष का जब हो जाये तो उसे प्राथमिक विद्यालय में भेजना चाहिए। बच्चे को किसी भी बात के लिए प्यार से समझाना चाहिए। बच्चों को पोस्टिक आहार देना चाहिए ताकि उनका विकास न रुके
