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बिहार राज्य के नालंदा जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता संगीता कुमारी जानकारी दे रही हैं कि मोबाइल वाणी पर चल रहा कार्यक्रम बहुत अच्छा है। इससे महिलायें जागरूक हो रही हैं। महिलायें जानती हैं और समझती हैं की उन्हें अगर जमीन पर हक मिल जाए तो वो अपने जीवन को बेहतर बना लेंगी। लेकिन फिर भी वो अपने अभिभावक या भाई को इस बारे में कुछ कह नहीं पाती है। अगर किसी महिला के साथ ससुराल में अप्रिय घटना हो जाए और उनके पास जमीन पर मालिकाना हक हो तो वो आसानी से कोई व्यवसाय कर आत्मनिर्भरता के साथ अपना और अपने बच्चे का भरण-पोषण कर सकती हैं। इसलिए महिलाओं को जमीन पर अधिकार मिलना चाहिए। ताकि उनका आगे का जीवन सुगम और सुखमय हो। समाज का नजरिया बदलने के लिए लोगों को जागरूक करना जरुरी है। लोगों की सोच बदलेगी तब ही महिलाओं को मान सम्मान भी मिलेगा
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
बिहार राज्य के जिला नालंदा से शम्भू प्रसाद , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि बचपन मनाओ बढ़ते जाओ कार्यक्रम सुनकर अच्छा लगा। अगर बच्चों के साथ खेला जाए है, तो बुजुर्गों को भी अच्छा लगता है क्योंकि उनके पास भी कोई काम नहीं रहता है। बुजुर्गों को बच्चों के साथ घुल मिल जाना चाहिए। बच्चों के भाव से पता चलता की उसको क्या कष्ट है।
बिहार राज्य के जिला नालंदा से शम्भू प्रसाद , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप सिर्फ वोट लें और लोगों को अपने लिए छोड़ दें क्योंकि आज के राजनीतिक दल वही काम कर रहे हैं जो गन्ना किसानों और मंटू कर रहे हैं। ऐसे लोग हैं जिनके पास केवल अपने अधिकार बचे हैं, उसके बाद भी उनके पास आधार कार्ड या कोई जानकारी नहीं है ताकि वे अपने काम के किसी भी पहलू को न खोएं। वहाँ की राशन योजना के साथ भी नहीं मिल सकता क्योंकि हमने इतने सारे खानाबदोश लोगों से बात की है क्योंकि लातूर जाति के लोग यहाँ आते हैं। और जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि नहीं, भाई, हम इस सब के बारे में कुछ नहीं जानते हैं, इसलिए हम यहाँ से वहाँ जाते हैं। अगर उन लोगों को भी राशन कार्ड दिए जाते तो उनके बच्चे को कुछ फायदा होता। क्योंकि उनके पास कहीं भी साधन नहीं हैं, जहां वे रहते हैं, उनके बच्चे का मतलब यह भी है कि विकास का कोई भी काम नहीं किया जा सकता है।
बिहार राज्य के जिला नालंदा से शम्भू प्रसाद , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि अब गर्मी से सुरक्षा एक अच्छा विकल्प है। सुबह जल्दी से जल्दी कोई भी काम करें और जब तक गर्मी होती है, होम्योपैथिक दवा का प्रयोग करे । अपनी बाहों को फैलाएँ और अधिक तरल पदार्थ पीएँ, और ऐसे फल खाएँ जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो जैसे कि तरबूज और खरबूजे। हम तीन गिलास पीकर जागते हैं,अगर हम अपना पेट खाली नहीं रख सकते हैं, तो दो गिलास चना दाल और नमक लें।
बिहार राज्य के जिला नालंदा से अशोक चौहान , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि नेता लोग ऐसी हैं जो जी. एस. टी. के नाम पर, किसी और के नाम पर और किसी और पिछड़ी जाति के नाम पर, फिर ये लोग आपस में फूट डालते हैं और फिर यहाँ से वोट की राजनीति शुरू होती है। तो एक तरफ जातिवाद को खत्म करने की बात है और दूसरी तरफ जातिवाद का सर्वेक्षण किया जा रहा है और फिर उन्हें अलग करने और अलग से बाहर लाने की कोशिश की जा रही है क्योंकि वहां जातिवाद के प्रवेश दर को मिलाने का क्या मतलब है? आपको समझ नहीं आता कि जिस गरीब व्यक्ति को आरक्षण दिया गया है, वह गरीब व्यक्ति क्यों है जिसे आरक्षण दिया गया है और अन्य आम जातियां गरीब क्यों नहीं हैं। भले ही कई लोग गरीब हों, लेकिन कई लोगों के लिए उनकी आय भी कम हो सकती है, तो उन्हें आर्थिक देश के नाम पर आरक्षण क्यों दिया जाता है।
बिहार राज्य के जिला नालंदा से शम्भू प्रसाद , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि राजनीतिक दल अपने वोट बैंक का उपयोग करके जनता को धोखा देते हैं। वोट देने के बाद कोई भी कोई काम नहीं करता है , राजनीतिक दल केवल वोट लेने तक सीमित हैं। व्यवस्था इस तरह होना चाहिए की बाहर से आये लोगों को नागरिकता उचित तरीके से मिले।
बिहार राज्य के जिला नालंदा से शम्भू प्रशाद , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है गर्मी बहुत बढ़ गया है। ठण्ड वाले फल खाएं ,कहीं भी बाहर जाएँ तो पानी पीकर निकले। बाहर जब निकले तब तौलिया लेकर निकले।
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