मजदूर छोटे और एक वक्त की रोटी के लिए मजबूर होते हैं लेकिन उनके परिश्रम को एक किसान दूसरे मजदूर अगर ना होता तो आज बड़े कि थाली मे अनाज नही होता। आज भी मनरेगा में काम करने के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ता है।हमारे अंदर डर के आगे जीत है विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।