दुमका:अविनिश कुमार बताते है की नारी को आज तक उसी तरह से देखा जाता है ,जैसे पहले देखा जाता था। महिला दिवस आया और चला गया जैसे की दीपावली आदि चला जाता है। महिलाओं को हम एक दिन खुश करते है पर इतना ही कर देने से स्त्रिओं के प्रति जो मानसिकता है क्या उसे हम बदल सकते है ?नहीं ,बल्कि हमे हर दिन आगे आना होगा और स्त्रिओं को सम्मान देना होगा।
