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आपको बताना चाहते हैं कि भारत के पंजाब प्रान्त के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के नज़दीक स्थित जालियाँवाला बाग में 13 अप्रैल, 1919 को बैसाखी के दिन रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए आयोजित दस से पंद्रह हज़ार लोगों की एक शान्तिपूर्ण सभा पर ब्रिगेडियर जनरल आरo ईo एचo डायर ने बिना किसी चेतावनी के अंधाधुंध गोलियाँ चलवा दीं। यह बाग चारों तरफ़ से लगभग दस फ़ीट ऊँची दीवार से घिरा था और इस बाग से निकलने वाले एकमात्र रास्ते पर उसने अपने हथियारबंद दस्ते को तैनात कर लगभग दस मिनट की अंधाधुंध फ़ायरिंग में 1650 राउंड गोलियाँ चलवायीं। इस बर्बर हत्याकांड में ब्रिटिश अभिलेखों के अनुसार 200 लोग घायल और 379 लोग शहीद हुए थे, जिनमें 337 पुरुष, 41 नाबालिग लड़के और एक छः सप्ताह का बच्चा था। जबकि अनधिकृत आँकड़ों के अनुसार इस हत्याकांड में 1000 से अधिक लोग मारे गए थे और 2000 से अधिक घायल हुए थे। अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484, जबकि जालियाँवाला बाग में 388 शहीदों की सूची है। पंडित मदन मोहन मालवीय के अनुसार कम से कम 1300 लोग मारे गए थे, जबकि स्वामी श्रद्धानंद के अनुसार 1500 और तत्कालीन सिविल सर्जन डॉक्टर स्मिथ के अनुसार मृतकों की संख्या 1800 से अधिक थी। गोलीबारी शुरू होते ही बहुत सारे लोग घबराहट में इस बाग में स्थित कुएँ में कूद पड़े थे, जिनमें अधिकांश महिलाएँ और बच्चे थे, बाद में 120 लोगों के शव इस कुएँ से निकाले गए। इस तिथि को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का काला अध्याय कहते हैं और ये माना जाता है कि इसी घटना के बाद से भारत में ब्रिटिश शासन की उल्टी गिनती शुरू हो गयी थी। 1997 में महारानी एलिज़ाबेथ ने इस स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी थी और 2013 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरान ने इस स्मारक के विज़िटर्स बुक पर लिखा कि “ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी।“
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July 22, 2020, 12:10 p.m. | Tags: int-PAJ