हजारीबाग,दारू से कुनाल कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से ये कह रहे है कि भारतीय नारी आज हर छेत्र में तरक्की कर रही है। हर वह काम को अंजाम दे रही है जो पुरष किया करते है। मगर आज भी वो घर के चार दिवारी बड़े पैमाने में भेद भाव की सीकर बनी हुई है। महिला ससक्ति करना में भले ही भारत की तस्बीर पहले से बेहतर नजर आती है मगर वो तस्वीर आज भी अधूरी है। भोत से सर्वेक्षण के जरिये ये पता चला है कि आज भी महिलाए को अपने छोटे मोटे फैसले लेने का हक़ नही है। हर 10 लड़की में 4 लड़की ऐसी है जिन्हें अपने सादी के फैसले में सामिल नही किया जाता है। इनमे से कियो को आज भी डॉक्टर से दिखने से पहले परिवार की इजाजत लेनी पड़ती है। कई लडकिय तो ऐसी है जीने अपने ही परिवार के साथ बहार जाने तक की अनुमति नही है। यह है हमारे देश होनो वाली हिंसा जो लडकियों के साथ आये दिन किया जा रहा है।
