जिला हजारीबाग के दारू प्रखंड से निरंजन गिरी ने झारखण्ड मोबाईल वाणी के माध्यम से कहते है की जिन महिलाओ की कोई संतान नहीं होती है उन्हें बाँझ कहा जाता है।परिवार,समाज में वैसी महिलाओ को को प्रताड़ित है।अगर कोई महिला विधवा हो जाती है तो समाज उसे जीने का अधिकार नहीं देता है। लेकिन क्या उस महिला को जीने की इच्छा नहीं होती? क्या उसका दुबारा शादी नहीं हो सकता है?ऐसी घटनाये गाँवो में अक्सर होती है।ऐसी घटनाओं के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए और महिलाओ को सहारा देना चाहिए उन्हें हक़ से जीने का अधिकार देना चाहिए।
