ध्यानचंद रवानी धनबाद से झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से महिलाओ पर हो रहे हिंसा पर अपनी राय देते हुए कहते है की आज महिलाओ पर हिंसाओ की वारदात दिनो-दिन बढ़ ही रही है,महिलाये न तो घर पर न ही बाहर ही सुरक्षित है, अखबारो में आय दिन महिलाओ के खिलाफ हो रहे अपराध के बारे में पढने को मिलता रहता है , महिलाये समाज की आधी आबादी है परन्तु उनका सम्मान तो दूर रहा वे इसी समाज में सुरक्षित तक नहीं है,इन्होने कहा महिलाओ को सामने आ कर अपने ऊपर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाना होगा
