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बिहार राज्य के नालंदा जिला के हिलसा प्रखंड से रंजन जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि राज्य में 13 जिलों के किसान अपने उत्पाद ऑनलाइन बेचेंगे। किसानों के उत्पाद को बेचने के लिए सरकार ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत करने जा रही है। इसका नाम ई-रकम रखा गया है। इसके लिए केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय और जीविका के साथ एमओयू साइन हुआ है। जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी बालामुरुगन डी. ने बताया कि जीविका के साथ 4 जनवरी को एमओयू साइन हो गया है। पहले चरण में इसी माह के अंत तक जमुई से इसकी शुरुआत होगी। मक्के से हो रही है शुरुआत : राज्य में मक्के की खरीदारी से इसकी शुरुआत हो रही है। बाद में सभी फसलों को ई-रकम सेंटर के माध्यम से बेचा जाएगा। ई-रकम सभी किसान उत्पादक संगठन वाले जिलों में खोले जाएंगे। ई-रकम सेंटर पर किसान अपने उत्पाद का नमूना रखेंगे। ई-रकम सेंटर के कर्मचारी कृषि उत्पाद की गुणवत्ता जांच करेंगे। गुणवत्ता जांच करने के बाद ई-रकम पोर्टल पर फोटो के साथ अपलोड कर दिया जाएगा। ई-रकम के जरिए किसान अपने उत्पाद सीधे बेच सकेंगे। ऐसे में बिचौलिये व कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा। किसान श्री पुरस्कार से सम्मानित अमरजीत सिंह ने बताया कि ऐसी योजनाओं से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे नगदी फसलों का भी उचित मूल्य मिलेगा।

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बिहार राज्य के नालंदा जिला के हिलसा प्रखंड से रंजन जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि राज्य के 814 अनुदानित मदरसों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी अब मध्याह्न भोजन मिलेगा। शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने सोमवार को यह निर्णय लिया। उन्होंने अतिशीघ्र अनुदानित 814 मदरसों में नामांकित और उपस्थित बच्चों को मिड डे मील उपलब्ध कराने का निर्देश अधिकारियों को दिया। शिक्षा मंत्री के इस आदेश से इन मदरसों में पढ़ने वाले करीब एक लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।शिक्षा विभाग के प्रवक्ता अमित कुमार ने मंत्री के निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से 814 मदरसों की जिलावार सूची मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक को उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि विभाग के स्तर पर लिए गए इस निर्णय के कार्यान्वयन के लिए निदेशक के स्तर से कार्रवाई की जा सके। इन सभी मदरसों में अनाज आदि की व्यवस्था होने और जिलों को मध्याह्न भोजन का परिवर्तन मूल्य उपलब्ध कराने के साथ ही यहां मिड डे मील का वितरण शुरू हो जाएगा। परिवर्तन मूल्य की राशि से चावल को छोड़कर अन्य सभी सामग्री की व्यवस्था की जाती है। इस माह के अंत तक सभी 814 अनुदानित मदरसों में बच्चों को दोपहर का भोजन मिलने लगेगा।गौरतलब है कि राज्य सरकार का यह सैद्धांतिक निर्णय है कि वैसे सभी प्रारंभिक विद्यालय जिसे सरकार द्वारा वित्तीय सहायता दी जाती है, वहां मध्याह्न भोजन योजना संचालित हो। राज्य के 1128 अराजकीय प्रस्वीकृत मदरसों में पूर्व से ही मध्याह्न भोजन योजना चल रही है।

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