बिहार राज्य के नालंदा जिला से गुड़िया देवी जीविका मोबाइल वाणी के माध्यम से पूरक आहार के बारे में जानकारी दे रही है कि सभी 6-8 माह तक के बच्चों को पाव भर के कटोरी में आधा-आधा कटोरी दिन में दो बार खिलाना चाहिए,9-12 माह तक के बच्चों को पाव भर के कटोरी में आधा-आधा कटोरी दिन में तीन बार खिलाना चाहिए और 12-24 माह तक के बच्चों को पाव भर के कटोरी में पूरी-पूरी कटोरी तीन कटोरी दिन में तीन बार खिलाना चाहिए। साथ में माँ का दूध भी पिलाना है।इससे बच्चें को पौष्टिक मिलता है।
बिहार राज्य के नालंदा जिला से शशिकला देवी जीविका मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिलाओं को रोज खाने में निम्न खाद्य समूह में से पांच खाद्य समूह ज़रूर शामिल करना चाहिए। जैसे अनाज और कंद-मूल,दाल-फलिया,बादाम और दूध से बनी चीज़ें,मांस और मछली,चावल आदि।
बिहार राज्य नालंदा जिला पंचायत कावा से संतोषी कुमारी जीविका मोबाइल वाणी के माध्यम से बच्चों के पूरक आहार की जानकारी दे रही हैं।उन्होंने बताया की जन्म से छह माह तक बच्चे को केवल माँ का दूध ही पिलाना चाहिए।जब बच्चा सात महीने का हो जाए तो उसे हर रोज ऊपरी आहार अवश्य देना चाहिए।जैसे चावल-दाल सब्जी मिस कर खिलाना चाहिए।बच्चों को खाना माप के अनुसार खिलाना चाहिए।6-8 माह के बच्चे को एक पाव की कटोरी से आधी कटोरी दिन में दो बार खाना खिलाना चाहिए।9-11 माह के बच्चे को 1 पाव की कटोरी से दिन में तीन बार आधी कटोरी के माप से खाना देना चाहिए।12-24 माह के बच्चे को 1 पाव की कटोरी से दिन में 3 बार खाना खिलाना चाहिए।बच्चा अगर खाना ना खाये तो उसे प्यार से बार-बार खाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।माँ के दूध से सिर्फ 6 महीने तक ही बच्चों को पूरा पोषण मिल पाता है।उसके बाद माँ के दूध के साथ-साथ बच्चे के लिए पूरक आहार बेहद जरुरी होता है।बच्चों को सात समूह में से चार समूह का खाना हर रोज जरूर खिलाना चाहिए।
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