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जिला नालंदा से मेहताब जी जीविका मोबाइल वाणी माध्यम से पौधा संरक्षण वैज्ञानिक एन.के सिंह से मशरूम की खेती और मधुमक्खी पालन पर बातचीत की,जिसमे एन.के सिंह का कहना है कि मधुमक्खी पालन कोई भी व्यक्ति कर सकते है।गरीब,भूमिहीन,शिक्षित,अशिक्षित,महिला वर्ग आदि । यह कम लागत में शुरू करने वाला व्यवसाय है।जीविका बहने इसे अपनाकर एक अच्छा आर्थिक उपार्जन कर सकती है।किसान बंधू व जीविका बहनो को कृषि विज्ञान केंद्र से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया जाता है,यहाँ से प्रशिक्षण लेकर सहायक निदेशक उद्यान पदाधिकारी से 50 प्रतिशत के अनुदान पर उन्हें बक्सा दिया जाता है। ठीक इसी तरह मशरूम की खेती में भी बहुत कम लागत लगता है। मशरूम का एक बैग मुश्किल से 20-30 रु लेते है और एक बैग मशरूम उपजाने पर कम से कम उससे एक से डेढ़ केजी मशरूम निकलता है और उसका आमदानी 200 रु होती है।अगर हमारे बहने व किसान बंधू अपने जगह में हज़ार बैग मशरूम लगाते हैं, तो उन्हें बहुत आमदनी होगी । इसी तरह मधुमक्खी से भी एक बक्सा से 50-60 केजी मधु इकठ्ठा किया जा सकता है।एक केजी मधु की कीमत लगभग 200-250 रु है और 40 केजी अगर मधु इकठ्ठा होती है,तो 100 रु करके बेचने पर भी 4 हज़ार रु प्रति बक्सा होता है।इसी तरह से देखा जाये तो उन्हें लगभग दो लाख सालाना आमदानी होता है। इस व्यवसाय को करने में ज्यादा समय नहीं लगता है। इसलिए अभी के समय में मशरूम की खेती और मधुमक्खी का पालन करना बहुत ही लाभदायक है। किसानो को मार्केटिंग का चिंता नहीं करना चाहिए,उसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र हमेशा प्रयासरत रहते है। उन्होंने यह भी बताया कि अगर किन्हीं को इस पर प्रशिक्षण लेना हो ,तो वे फरवरी में एक बैच शुरू होने वाला है,उसमे आवेदन कर सकते है । यहाँ उन्हें रहने और खाने-पिने की सारी सुविधा दी जाती है।
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