सभी साथियों को संतोष का नमस्कार साथियों मैं अपने दिल की व्यथा आप लोगों के साथ साझा किया हूं मैं मानता हूं कि पुरुष प्रधान समाज है हर तरफ बेटी को बढ़ावा नहीं दिया जाता है अगर बेटी को बढ़ावा दें तो जिस प्रकार बीटा आगे बढ़ता है उनसे कई गुना आगे बेटी बढ़ेगी लेकिन हम जब बेटी को आगे बढ़ाने का समय होता है तो सिर्फ हम शादी की बातें की चर्चा करते हैं समाज में कुछ चुनिंदा व्यक्ति है जो इन बातों को समझ पाए हैं लेकिन आंकड़े के अनुसार अगर बात करें तो काफी तादात में सिर्फ बेटी को भी समझ पाई है बहुत जल्दी हाथ लाल पीले करने के लिए सोचते हैं और सोचते रहते हैं कि हमारे घर से बेटी की डोली उठ जाए और वहां जाकर एक नया घर अपनाएं लेकिन आपने जो सोच रहे हैं कहीं ना कहीं मुझे लग रहा है यह गलत साबित हो सकता है कि एक बेटी की शादी की उम्र 18 वर्ष हेतु हुई है एक बेटी को होने के लिए 21 वर्ष की उम्र होती है शादी होने के बाद 1 से 2 साल के अंदर मां बन जाती है और उसको खेलने का कूदने का समय होता है उस समय उसे घर संभालने की नौबत आ जाते हैं जो कि उसे घर की सही तरीके से अपना तो जीवन यापन की तरीका तो समझ ही नहीं पाए थे और वह एक घर कैसे संभाल पाएंगे सास-ससुर हर किसी का गाना सुनते सुनते हुए मानसिक रूप से बीमार हो जाते हैं तब तक इसके गोदी में 1 बच्चे आ जाते हैं और जब वह बच्चा आता है तो ऐसा रूप होता है जानू उसकी नरक की और हमने धकेला है यानी माता पिता समाज का भी अहम भूमिका होते हैं मैं चाहता हूं इस समाज में ऐसे गुरु को दूर करें और कुशल समाज का निर्माण करें जिसमें सबसे ज्यादा जानकारी पुरुष प्रधान को देना होगा बेटी को अगर आगे बढ़ आओगे तो कहीं न कहीं 12 का नाम होगा आगे जाकर नाम को रोशन करेगा नहीं तो आप भी समझ कर आपकी बेटी आपके घर बैठे आज हैं इनकी शादी रचाई और एक दिन आप बहुत बुरा होगा इस रचना से मैं यही कहने के लिए धन्यवाद
