बिहार के जिला नालंदा प्रखंड हरनौत से शंतोष ने जीविका मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि दहेज़ प्रथा एवं बाल विवाह देश और समाज के लिए अभिशाप है। बहुत सी बेटियां दहेज़ नहीं देने की स्तिथि में जीवन भर अपने पिता के दरवाजे पर उम्र बीता देती है। दूसरी तरफ दहेज़ ज्यादा न देना पड़े इस वजह से कम उम्र में बेटी की शादी कर दी जाती हैं जिसके कारण कम उम्र में गर्भधारण करने में कठिनाई होती है। दहेज़ प्रथा का कानून हमारे देश में 1961 और बाल विवाह का कानून 2006 में बनाया गया था लेकिन कानून बनने के बाद भी दहेज़ प्रथा और बाल विवाह समाज में रोका नहीं जा सका है,बल्कि बढ़ते समय के साथ यह भयंकर रूप धारण कर लिया। जब तक विवाह में दहेज़ का अविष्कार नहीं होगा तबतक हमारे समाज में दहेज़ प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीति का अंत नहीं होगा।
