झारखण्ड राज्य से सीमा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण अचानक सूखा और बाढ़ फसलों के लिए सबसे विनाशकारी स्थितियां हैं, जो भारत में कृषि उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। सूखा मिट्टी की नमी को खत्म कर फसलें सुखा देता है, जबकि अचानक आई बाढ़ मिट्टी में ऑक्सीजन कम करके पौधों की जड़ों को सड़ा देती है और पोषक तत्वों को बहा ले जाती है।इससे बचाव के लिए कुछ उपाय अपनाया जा सकता है। जैसे - बाढ़ सहन करने वाली फसलों की किस्में और मिश्रित खेती अपनाना।दूसरा,सूखे से निपटने के लिए मिट्टी के प्रबंधन में सुधार और जल संरक्षण की तकनीकों का उपयोग करना।तीसरा, जल निकासी प्रणालियों का प्रबंधन करना ताकि बाढ़ के पानी को जल्दी निकाला जा सके।
झारखण्ड राज्य के धनबाद जिला से शिल्पी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि जल संरक्षण से खेती में मदद मिलेगी। अगर लोग वर्षा के जल को खेत में चारों ओर से मेढ़ बनाकर ढलान से बहने से रोके तो पानी मिट्टी में डिस कर नमी बनाता है। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और अगर खेत में तालाब के लिए गड्ढा खोदा जाए तो इसमें भी वर्षा जल को एकत्रित करके रख सकते हैं जो बाद में सिंचाई में काम आएगा। जल संरक्षण बहुत जरूरी है।
