NGO के माध्यम से निरक्षरों एवं अंधविश्वासियों पर कार्यशाला होना चाहिए
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जिला धनबाद,प्रखंड बाघमारा से बीरबल महतो जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि जब से पेंशनधारियों को बैंको के द्वारा भूगतान शुरू हुई है तब पेंशनधारियों के लिए खास कर वृद्ध एवं विकलांगों के लिए पेंशन की राशि लेना जी का जंजाल बन गया है।सरकार द्वारा वृद्ध,विकलांग एवं असहायों के लिए 1 मई 2009 से पेंशन लागु किया है। पहले पोस्ट ऑफिस के माध्यम से पेंशनधारियों को पेंशन का भूगतान कर दिया जाता था।परन्तु अब बैंकों के द्वारा दिया जाता है ,जिससे विकलांगों को शारीरिक एवं मानशिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।इसके पीछे एक वजह यह है कि कई जगहों पर बैंक दो मंजिला माकन की ऊपरी तल्ले पर होने के कारण सीढ़ियों के द्वारा वृद्ध एवं विकलांग व्यक्तियों को बैंक जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।जिससे उन्हें शारीरिक कष्ट होता है।इतना ही नहीं कई जगहों पर बैंक कर्मियों द्वारा पेंशनधारियों को हिन् दृष्टि से भी देखा जाता है।इसके आलावा बैंक कर्मियों द्वारा कभी वोटर आईडी कार्ड तो कभी आधार कार्ड की मांग कर भी उन्हें मानशिक कष्ट दिया जाता है।अतः वे सरकार से अपील करते हैं कि सरकार द्वारा दो मंजिला बैंकों में लिफ्ट की सुविधा देना चाहिए एवं पेंशनधारियों के लिए एक अलग काउंटर बनाए जाये ताकि पेंशनधारी वृद्ध,विकलांग,असहाय एवं जरुरत मंद को किसी प्रकार का कष्ट ना हो सके।
जिला धनबाद बाघमारा से बीरबल महतो जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि तेज गति से डीजे साउंड शारीरिक एवं मानशिक हानिकारक होते हैं। संगीत को सभी वर्ग के लोग पसंद करते हैं जब भी लोग अकेले,दुखी,ख़ुशी या किसी की याद आती है तो संगीत सुन लेते हैं। संगीत की सामान्य आवाज 60 डीबी होती है और 80 डीबी की आवाज हम सभी के लिए हानिकारक होते हैं। अधिक संगीत की आवाज होने पर सुनने की क्षमता बहुत कम हो जाती है। सरकार द्वारा पहले ही उच्च ध्वनि पर रोक लगाई गई है, पर आज के युवा पीढ़ी डीजे साउंड को ही अधिक महत्व दे रहे हैं। इससे ध्वनि प्रदूषण के साथ-साथ सभी वर्ग के लोगो को कई दिक्क्तों का भी सामना करना पड़ता है।छात्र-छात्राओं के पढाई में कई बाधा आ जाती है।अतः सभी वर्ग के लोगों को इसके खिलाफ आवाज उठा कर युवाओं को जागरूक कर डीजे साउंड की आवाज को कम करना चाहिए।
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बीरबल महतो,जिला धनबाद के बाघमारा प्रखंड से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि आज के भाग-दौड़ जिंदगी में सड़क दुर्घटना होना आम बात है,लोग अपनी सुख-सुविधाओं के लिए अनेक प्रकार के यातायात साधन अपनाये है परन्तु अपनी असावधानी के कारण सड़क दुर्घटनाये होती रहती है।कई बार देखा जाता है की अधिकतर वाहनचालक नशे का सेवन करते है जिसके कारण दुर्घटना होती है।वही कुछ गाड़ीचालक गाड़ी चलाने के दौरान फोन पर बात करते है जिससे उसका ध्यान रास्ते से भटक जाते है जिसकारण दुर्घटना होती है इसके साथ कुछ गाड़ी ओवरलोड होने के कारण संतुलन खो जाते है।
झारखण्ड राज्य के धनबाद जिला से बीरबल महतो ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सी एन टी और एस पी टी एक्ट में संशोधन आदिवासिओं और मूलवासिओं के साथ अन्याय है।संशोधन के द्वारा उनके साथ विश्वासघात किया जा रहा है।झारखण्ड के आदिवासिओं और मूलवासिओं ने अंग्रेजों के साथ लम्बी लड़ाई लड़ी एवं कई बलिदानों के बाद उन्होंने अपने सम्मान एवं अधिकार को पाया है।अगर सरकार संशोधन को लागू कर देती है तो,जमीन की कीमत छः गुना तक बढ़ जाएगी, जिससे गरीबों पर टैक्स का भार अधिक बढ़ जायेगा। इस बढे हुए टैक्स को गरीब अगर नहीं चूका पाएंगे तो सरकार उनकी जमीनों को अपने कब्जे में लेकर नीलाम कर देगी। इस प्रकार आदिवासी और मूलवासी अपने ही जमीन से बेदखल हो जायेंगे और खुद को ठगा महसूस करेंगे।झारखण्ड की धरती बिरसा मुंडा और सिंधु-कान्हू जैसे महान लोगों की कर्मभूमि है।झारखण्ड राज्य की आज आवश्यकता है, कि सांसद और विधायक, अपने पार्टी से ऊपर उठ कर आदिवासिओं एवं मूलवासिओं के स्वाभिमान की रक्षा हेतु कार्य करें और सी एन टी और एस पी टी एक्ट में संशोधन का विरोध करें अन्यथा बहुत देर हो जाएगी।सरकार पलायन कर रहे झारखंडियों को रोके, इनके लिए रोजगार मुहैया करवाए ,तभी जाकर झारखण्ड का विकास संभव होगा। अन्यथा सरकार की बातें हाथी के दाँत के समान प्रतीत होंगी।
धनबाद से बीरबल महतो जी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि माता -पिता नादानी या मजबूरी की वजह से अठारह साल से कम लड़की और इक्कीस साल से कम लड़के की शादी कर देते हैं।बाल -विवाह कानूनी अपराध के साथ -साथ एक सामाजिक कुरीति भी है।एक तरफ हम बच्चों के उज्वल भविष्य की कामना करते हैं ,समानता और विकास की बात करते हैं।वहीं दूसरी तरफ बाल -विवाह कर के उन के जीवन के साथ खिलवाड़ करते हैं।बाल -विवाह करने के पीछे कई कारण हैं , जैसे -माता-पिता दहेज देने से बचने के लिए समय से पहले ही लड़की की शादी कर देते हैं।साथ ही अशिक्षा तथा सरकार द्वारा बनाई गई निति का दृढ़ता पूर्वक पालन नहीं करना,मुख्य कारण है।इस कुप्रथा को रोकने के लिए सभी बुद्धिजीविओं को आगे आना होगा और बच्चों को उनका अधिकार दिलवाना होगा।बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे ,इस के लिए माता -पिता ,परिवार के साथ -साथ समाज को भी अपना योगदान देना होगा। बाल -विवाह को खत्म कर,भारत को महान बनाना होगा।
