बारिश अब सिर पर है। पिछले साल के बरसात में जल जमाव को याद कर जीविका दीदी रसोई के स्टाफ को सिरहन होने लगता है। बरसात में उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी। इसी प्रकार स्टॉफ क्वॉर्टर में जलजमाव में आने-जाने में समस्या होती है। बताते हैं कि पिछले साल के बरसात के जल जमाव में मरीजों के लिये भोजन की आपूर्ति करने वाली जीविका दीदी के किचन में भी जल जमाव था। पानी में खड़ा हो कर खाना बनाती थी । किचेन से अस्पताल तक चावल दाल सब्जी का ड्राम ले जाने में बड़ी परेशानी होती थी। जीविका दीदी बताती है कि किचेन से अस्पताल तक तीन फीट पानी से होकर जाना पड़ता था। कई बार तो पानी के अंदर पैर का बैलेंस ़खराब हो जाने पर खाना पानी में गिर जाता था।जिसके चलते दुबारा खाना बनाना पड़ता था। जीविका दीदी बताती है कि किचेन में एक छोड़ सभी 12 स्टाफ महिलाएं हैं। महिलाएं को अस्पताल तक खाना ले जाने में क्या परेशानी होती होगी यह सोचने की बात है। बताती है कि इस बार भी बरसात में जल जमाव होना तय है। क्योंकि कही भी जल निकासी का रास्ता नही है और नहीं एप्रोच रोड ऊंचा हुआ है। इसको लेकर कई बार जीविका दीदी ने सीएस से एप्रोच रोड निर्माण को लेकर शिकायत भी की है। जानकर बताते हैं कि सदर अस्पताल में करीब 70 से 80 मरीज भर्ती रहते हैं। हॉस्टल के भी लड़के लड़कियां खाना खाने आती हैं। भर्ती मरीज को बेड पर खाना देना पड़ता है।