रायबरेली लखनऊ की सीमा पर स्थित चुरुवा टोल प्लाजा के निकट पारिजात लिक की तरफ से क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया गया। जिसमें वरिष्ठ समाजसेवी उमाशंकर त्रिवेदी द्वारा फीता काटकर ग्रामीण क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ किया गया। इस दौरान उमाशंकर त्रिवेदी ने कहा कि खेलकूद समाज की अनोखी पहल है, जिसमें युवाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलता है। जिससे युवाओं का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। इसलिए खेलों की प्रतियोगिता करना समाज के हित में है। टूर्नामेंट में 11 ग्रामीण टीमों द्वारा भाग लिया गया जिसमें लालपुर क्रिकेट टीम एवं चुरूवा क्रिकेट टीम के बीच टूर्नामेंट हुआ जिसमें लालपुर की टीम द्वारा चुरुवा टीम को पराजित कर विजय हासिल की गई। कार्यक्रम के आयोजक संदीप द्विवेदी के द्वारा सभी खिलाड़ियों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर गुरुवार को ब्लॉक भर में एक से 19 वर्ष की आयु के बच्चों को एल्बेडा जोल की दवा खिलाई गई। सीएचसी अधीक्षक एके जैसल के नेतृत्व में स्वास्थ्य टीम ने राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, श्री गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज, प्राथमिक विद्यालय बछरावां, आरडीजेएस कॉलेज समेत अन्य संस्थाओं में जागरूकता कार्यक्रम के साथ-साथ ही बच्चों को दबाए खिलाई गई। इस मौके पर सीएचसी अधीक्षक ए के जैसल ने कहा कि विद्यार्थियों को कृमि मुक्ति की दवा खिलाकर अभियान का शुभारंभ किया गया है। प्रत्येक 6 माह के दौरान हर व्यक्ति को इस दवा का सेवन करना चाहिए।

बछरावां थाना परिसर में गुरुवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण पर हुए न्यायालय के आदेश के बाद धार्मिक सद्भाव बना रहे, इसको लेकर उच्च अधिकारियों के निर्देश पर कोतवाल विजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में थाने में पीस कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया। आयोजित बैठक में दोनों ही समुदायों के धर्म गुरुओं को बुलाकर बैठक की गई। शांति व्यवस्था को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों से शांति व्यवस्था बनाए रखने का आवाहन किया है। क्षेत्र में अमन चैन कम रखने की अपील की गई वहीं हिदायत भी दी गई कि यदि इस प्रकरण को लेकर कोई भड़काऊ भाषण या सोशल मीडिया पर पोस्ट प्रसारित की जाती है, तो विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

रायबरेली।राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (एनडीडी) का उद्घाटन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. वीरेंद्र सिंह ने केन्द्रीय विद्यालय में बच्चों को पेट से कीड़े निकालने की दवा एल्बेंडाजोल खिलाकर किया। इसके साथ ही उन्होंने उपस्थित बच्चों को भी दवा खाने के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि पेट में कीड़े होने से शरीर में खून की कमी हो जाती है और बच्चे बार-बार बीमार पड़ते हैं, जल्दी थक जाते हैं। इसके साथ ही शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है और वह ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। इन सभी समस्याओं का समाधान है कि हर छह माह में कीड़े निकालने की दवा का सेवन किया जाये। इसलिए सरकार द्वारा साल में दो बार फरवरी और अगस्त में एल्बेन्डाजोल खिलायी जाती है। साल में एक बार एनडीडी के माध्यम से और दूसरी बार राष्ट्रीय फाइलेरिया उनमूलन कार्यक्रम के तहत सर्वजन दवा सेवन अभियान के माध्यम से एल्बेन्डाजोल खिलाई जाती है। जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डी एस अस्थाना ने बताया कि एक से 19 वर्ष के 15.29 लाख बच्चों, किशोरों और किशोरियों को दवा पिलाने का लक्ष्य है जिसके सापेक्ष 10.19 लाख बच्चों को दवा खिलाई गई ।जो बच्चे, किशोर और किशोरी किन्हीं कारणों से इस दिन दवा खाने से रह गए हैं उन्हें पाँच फरवरी को मॉप अप राउंड के चलाकर खिलाई जाएगी। जनपद के कुल 3569 सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों एवं 2839 आंगनबाड़ी केंद्रों पर यह दवा खिलाई गई। कृमि मुक्ति दवा के सेवन के यह लाभ हैं कि इससे एनीमिया दूर होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। इसके साथ ही स्वास्थ्य और नीतेश जायसवाल ने कृमि संक्रमण के लक्षणों के बारे में बताया कि पेट में दर्द, कमजोरी, उल्टी और भूख न लगना कृमि संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं। बच्चे के पेट में कीड़े की मात्रा जितनी अधिक होगी उसमें लक्षण उतने ही अधिक होंगे। हल्के संक्रमण वाले बच्चों में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखते हैं। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक, डॉ राकेश यादव नोडल शहरी क्षेत्र, डीईआईसी मैनेजर नितेश जायसवाल, विनय पांडे शहरी स्वास्थ्य समन्वयक, क्षितिज दीक्षित, विद्यालय के शिक्षक और छात्र मौजूद रहे।

नगर स्थित बस स्टॉप स्थित स्मार्ट मोबाइल शोरूम का हुआ उद्घाटन शोरूम के मालिक मो अयूब ने बताया कि हमारे यहां हर कंपनी के एनराइड फोन स्मार्ट वॉच ब्लूटूथ नेकबैंड टीबी ब्लूटूथ आदि मौजूद हैं

ऊंचाहार सीएचसी में छात्रों के ब्लड जांच कराए जाने की वजह से सीएचसी में लगा रही है भारी भीड़ ऊंचाहार से मोबाइल वाणी की खास रिपोर्ट एस एन तिवारी पंकज

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...

सुनिए एक प्यारी सी कहानी। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों की बोलने, सीखने और जानने की समझ बढ़ा सकते है। ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके बच्चे ने ये कहानी सुनी? इस कहानी से उसने कुछ सीखा? क्या आपके पास भी कोई नन्ही कहानी है? हमें बताइए, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।

जन्म से आठ साल की उम्र तक का समय बच्चों के विकास के लिए बहुत खास है। माता-पिता के रूप में जहाँ हम परवरिश की खूबियाँ सीखते हैं, वहीँ इन खूबियों का इस्तेमाल करके हम अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दे सकते है। इस बारे में श्रोताओं की क्या राय है, चलिए सुनते हैं. इस बारे में बचपन मनाओ... सुन रहे दूसरे साथियों को भी जानकारी दें। अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए दबाएं नंबर 3.

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