हमारे देश में सभी को शिक्षा का अधिकार है लेकिन लड़कियों को इसके लिए कहीं अधिक संघर्ष करना पड़ता है। कई बार घर के काम के बोझ के साथ स्कूल के बस्ते का बोझ उठाना पड़ता है तो कभी लोगों की गंदी नज़रों से बच-बचा के स्कूल का सफर तय करना पड़ता है। जैसे-तैसे स्कूल पहुंचने के बाद भी यौन शोषण और भावनात्मक शोषण की अलग चुनौती है जो रोज़ाना उनके धैर्य और हिम्मत की परीक्षा लेती है। ऐसे में लड़कियों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन के साथ साथ समाज की भी है। तब तक आप हमें बताइए कि * -----लड़कियों के स्कुल छोड़ने के या पढ़ाई पूरी ना कर पाने के आपको और क्या कारण नज़र आते है ? * -----आपके हिसाब से हमें सामाजिक रूप से क्या क्या बदलाव करने की ज़रूरत है , जिससे लड़कियों की शिक्षा अधूरी न रह पाए।
22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा देश के तमाम बीआईपी और बीवीआईपी के रूप में मेहमान शामिल होने आ रहे हैं उनके सेहत को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य महकमा ने लाखों की दवाएं खरीद ली है
विभिन्न प्रांतो एवं शहरों से आस्था स्पेशल ट्रेन रामनगरी पहुंचेगी पहले आस्था ट्रेन 26 जनवरी को आएगी रामनगरी
महर्षि वाल्मीकिअंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए चार ई बस एक्सप्रेस सेवा का संचालन आज से शुरू हो गया है जिसका किराया सो रुपए प्रति यात्री निश्चित है
अयोध्या धाम की पांच प्रमुख मार्गों पर आज से दौड़ रही हैं इलेक्ट्रिक ई बसें जिनमें प्रमुख मार्ग रायबरेली, सुल्तानपुर, अकबरपुर, बस्ती गोरखपुर गोंडा, और लखनऊ मार्ग प्रमुख है
जन्म से आठ साल की उम्र तक का समय बच्चों के विकास के लिए बहुत खास है। माता-पिता के रूप में जहाँ हम परवरिश की खूबियाँ सीखते हैं, वहीँ इन खूबियों का इस्तेमाल करके हम अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दे सकते है।आप अपने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ाने और उन्हें सीखाने के लिए क्या-क्या तरीके अपनाते है? इस बारे में बचपन मनाओ सुन रहे दूसरे साथियों को भी जानकारी दें। अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए दबाएं नंबर 3.
सुनिए एक प्यारी सी कहानी। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों की बोलने, सीखने और जानने की समझ बढ़ा सकते है।ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके बच्चे ने ये कहानी सुनी? इस कहानी से उसने कुछ सीखा? क्या आपके पास भी कोई नन्ही कहानी है? हमें बताइए, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।
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