झुलसा रोग दो प्रकार के होते हैं। अगेती झुलसा और पछेती झुलसा। अगेती झुलसा दिसंबर महीने की शुरुआत में लगता है। इस रोग में पत्तियों की सतह पर छोटे-छोटे भूरे रंग के धब्बे बनते हैं। सर्वप्रथम नीचे की पत्तियों पर संक्रमण होता है, जहाँ से रोग ऊपर की ओर बढ़ता है। जिनमें बाद में चक्रदार रेखाएं दिखाई देती है। उग्र अवस्था में धब्बे आपस में मिलकर पत्ती को झुलसा देते हैं। इसके प्रभाव से आलू छोटे व कम बनते हैं। जबकि पछेती झुलसा दिसंबर के अंत से जनवरी के शुरूआत में लगने की संम्भावना रहती है। जो आलू के लिए ज्यादा नुकसानदायक होता है। इस बीमारी में पत्तियाँ किनारे व शिरे से झुलसना प्रारम्भ होती हैं। जिसके कारण पूरा पौधा झुलस जाता है। पौधों के ऊपर काले-काले चकत्ते दिखाई देते हैं, जो बाद में बढ़ जाते हैं। जिससे कंद भी प्रभावित होता है।