सुनिए एक प्यारी सी कहानी। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों की बोलने, सीखने और जानने की क्षमता बढ़ा सकते है। ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके बच्चे ने ये कहानी सुनी? इस कहानी से उसने कुछ सीखा? अगर आपके पास भी है कोई मज़ेदार कहानी, तो रिकॉर्ड करें फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।
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नमस्कार श्रोताओं , आप अंबेडकर नगर मोबाइल वाणी सुन रहे हैं और मैं आशीष श्रीवास्तव हूं , आइए जानते हैं कि आज अंबेडकर नगर के बाजार में ताजी सब्जियों की कीमत क्या है । कर पंद्रह सौ नब्बे रुपये प्रति क्विंटाल है हरकेल की दर चौबीस सौ अस्सी रुपये से पच्चीस सौ सत्तर रुपये प्रति क्विंटाल कड़वे लौकी की दर बाईस सौ सत्तर रुपये से बाईस अस्सी रुपये प्रति क्विंटाल बोतल लौकी की दर अठारह सौ रुपये है । अठारह सौ सत्तर रुपये प्रति क्विंटाल से बैंगन की कीमत अठारह पचास रुपये से उन्नीस सौ बीस रुपये प्रति क्विंटाल है , शिमला मिर्च की कीमत चार हजार तीन सौ बीस रुपये से चालीस सौ बीस रुपये प्रति क्विंटाल है । हरी मिर्च की कीमत बारह सौ रुपये से लेकर बारह सौ सत्तर रुपये प्रति कुंतल तक है । प्याज की कीमत अट्ठाईस सौ रुपये से लेकर अट्ठाईस सौ सत्तर रुपये प्रति क्विंटाल तक है । परवाल की दर अठारह सौ से अठारह सौ सत्तर रुपये प्रति कुंतल है । आलू की कीमत एक सौ रुपये से लेकर उनतीस सौ सत्तर रुपये प्रति कुंतल , कद्दू की कीमत सात सौ चालीस रुपये से लेकर आठ सौ तीस रुपये तक , लौकी की कीमत पंद्रह सौ सत्तर रुपये से लेकर सोलह सौ रुपये प्रति कुंतल है । टमाटर की कीमत एक सौ पचहत्तर रुपये प्रति कुंतल , फूलगोभी की कीमत तीन हजार रुपये से लेकर इकतीस सौ पचास रुपये प्रति कुंतल , मूंगफली की कीमत ग्यारह सौ तीस रुपये से लेकर बारह सौ रुपये प्रति कुंतल और मूंगफली की कीमत छब्बीस सौ से लेकर छब्बीस सौ रुपये प्रति कुंतल है । पालक की कीमत पचास रुपये प्रति कुंतल , गाजर की कीमत बारह सौ चालीस रुपये से तेरह सौ बीस रुपये प्रति कुंतल , खीरे की कीमत सोलह सौ सत्तर रुपये से पंद्रह सौ अस्सी रुपये प्रति कुंतल , खीरे की कीमत चौबीस सौ रुपये से चौबीस सौ अस्सी रुपये प्रति कुंतल है । पत्तागोभी की कीमत प्रति कुंतल एक हजार बीस रुपये से ग्यारह सौ बीस रुपये प्रति कुंतल है , मोली की कीमत आठ सौ रुपये से नौ सौ रुपये प्रति कुंतल है । दर सोलह सौ तीस रुपये से लेकर सत्रह सौ रुपये प्रति कुंतल तक है और आप सभी अपने आस - पास की खबरों को सुनने के लिए अंबेडकर नगर मोबाइल ऐप डाउनलोड करें और तब तक कुछ विशेष समाचार प्राप्त करें , आप सभी को नमस्कार ।
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिलदेव शर्मा कृषि में जैव उर्वरक एज़ोला के उपयोग के बारे में बता रहे हैं । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
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भारत में शादी के मौकों पर लेन-देन यानी दहेज की प्रथा आदिकाल से चली आ रही है. पहले यह वधू पक्ष की सहमति से उपहार के तौर पर दिया जाता था। लेकिन हाल के वर्षों में यह एक सौदा और शादी की अनिवार्य शर्त बन गया है। विश्व बैंक की अर्थशास्त्री एस अनुकृति, निशीथ प्रकाश और सुंगोह क्वोन की टीम ने 1960 से लेकर 2008 के दौरान ग्रामीण इलाके में हुई 40 हजार शादियों के अध्ययन में पाया कि 95 फीसदी शादियों में दहेज दिया गया. बावजूद इसके कि वर्ष 1961 से ही भारत में दहेज को गैर-कानूनी घोषित किया जा चुका है. यह शोध भारत के 17 राज्यों पर आधारित है. इसमें ग्रामीण भारत पर ही ध्यान केंद्रित किया गया है जहां भारत की बहुसंख्यक आबादी रहती है.दोस्तों आप हमें बताइए कि *----- दहेज प्रथा को लेकर आप क्या सोचते है ? और इसकी मुख्य वजह क्या है ? *----- समाज में दहेज़ प्रथा रोकने को लेकर हमें किस तरह के प्रयास करने की ज़रूरत है ? *----- और क्यों आज भी हमारे समाज में दहेज़ जैसी कुप्रथा मौजूद है ?
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