चतरा को झारखण्ड या छोटा नागपुर का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। 1857 के विद्रोह के दौरान छोटानागपुर में विद्रोहियों और ब्रिटिशों के बीच लड़ा जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई ‘चतरा की लड़ाई’ थी। चतरा झारखंड राज्य की राजधानी से रांची जिले से करीब 124 किलोमीटर दूर है। चतरा में आप सड़क माध्यम के द्वारा पहुंच सकते है। और क्या क्या घूमने लायक है चतरा ज़िले में , ये जानने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें।

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हैलो बच्चों , मेरा नाम रिंकू डेरिवा है । मैं पटनावर से बोल रहा हूँ । मैं अपनी माँ को एक कविता सुना रहा हूँ । वह झांसी की रानी हैं । रख में ही आई , फिर भा मेरी जवानी थी , घूमी थी , आज़ादी की के लिए , सब क्या चाहते हैं , दो चिरंगी को सपने में खाते , चमकदार संस्थान , वह तलवार पुरानी थी । बुलंद के हरलों के मुह हमने सुनील में कहानी दी खूब लदी मदनी आइटम झस्सी वाली रानी दी कानपुर केनाना की मुखवाली बहन उच्छवी ली थी लक्ष्मीबार । नाम पिता का वह सुल्तान अकेला था , वह नाना के साथ पढ़ती थी , वह नाना के साथ खेलती थी , बुर्ची हाल पपानी कतरी , उनकी लह पहेली विरशला जी की गाथा थी ।

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बिहार राज्य के पटना जिला से रेनू कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से प्रस्तुत किया एक कहानी

दोस्तों, हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे।

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भी दीदी भैय्याओं को नमस्कार । मेरा नाम फेजपुरा की वेकुमारी मेहबूबा है । मैं पटना जिले से हूँ । मैं आपको एक हरी चटनी के बारे में बताने जा रहा हूँ । समय निकालें और चटनी का स्वाद और रंग दोनों प्राप्त करने के लिए आलू को मिलाएं , और चटनी इतनी मोटी है कि अगर इसे दूध से बनाया जाता है तो इसे बाजार की तरह घर का बना पनीर बनाया जा सकता है । नींबू और दही जोड़ें , पनीर बहुत साफ और प्रचुर मात्रा में होगा । अंडे को उबलने में ज्यादा देर न करें ।