संविधान निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाने वाले डॉ आंबेडकर ने संविधान सभा में भाषण देते हुए कहा था, कि इसकी असलती खूबसूरती तब है जब इसे इसके वास्तविक स्वरूप में लागू किया जा सके, अन्यथा यह किताब में लिखे कुछ खूबसूरत वाक्यों से ज्यादा कुछ नहीं।

भारतीय संविधान को 74 वर्ष पूर्व 26 नवंबर 1949 को लिख कर पूर्ण हुआ था। और 26 जनवरी 1950 को देश प्रजातांत्रिक घोषित हुआ था। संविधान के 465 अनुच्छेद में एक अनुच्छेद 51 (ए) एच भी है। इस अनुच्छेद के अनुसार वैज्ञानिक सोच, चेतना का विकास, मानवतावाद, किस भी घटीत धटना के पीछें की सत्यता की जांच व सुधार की भावना विकसित करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा। और इस के संचालन के लिए राज्य कटिबध्द होगे। लेकिन ऐसा हमें कही दिखाई नहीं देता है। वैज्ञानिक सोच व मानवतावादी आम जनमानस के लिए यह एक मात्र शब्द है। जो अपनी यथार्थ के मुल विषय को छू भी नहीं पाता है।

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ जीवदास साहू बैगन की खेती के लिए समय और बीज का चयन की जानकारी दे रहे है। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें...

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ये लिंग का भेद जिस दिन समाज से जायेगा, तब यहाँ रहने वाले हर एक लोग इंसान कहलाएगा।बदलाव के इस खूबसूरत सफर में आप भी हिस्सा लें लिंग और जेंडर के नाम पर होने वाले भेद-भाव और हिंसा पर अगर आपकी भी कोई कहानी है, तो देर मत कीजिये अपनी आवाज बुलंद कीजिये और अभी रिकॉर्ड कीजिये मोबाइल वाणी के साथ।

हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। हो जाइए तैयार, हंसने-हंसाने के लिए... CTA: सुनिए हंसी-मज़ाक में डूबे हंसगुल्ले और रिकॉर्ड कीजिए अपने चुटकुले मोबाइल वाणी पर, फोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।

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चुनावी माहौल में हिंसा, बहुत पुरानी बात नहीं है, बिना हिंसा के शायद ही कोई चुनाव होता हो, बंगाल इस मामले में सबसे आगे है, जहां पंचायत से लेकर सांसद तक के चुनाव बिना हिंसा के पूरे नहीं होते, यहां राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता अपने विरोधी दलों के कार्यकर्ताओं को मरने मारने पर उतारु रहते हैं।

हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। हो जाइए तैयार, हंसने-हंसाने के लिए...

महात्मा बुद्ध, आदिगुरु शंकराचार्य, गुरु रामानंद और स्वामी विवेकानंद आदि ने जहां दुनिया में शांति, त्याग और अध्यात्म का परचम लहराया वहीं पिछले कुछ दशकों से उभरने वाले किस्म-किस्म के बाबाओं ने राष्ट्र के मुख पर कालिख पोतने का काम किया है। अपनी अनुयायी स्त्रियों के शारीरिक शोषणए हत्या.अपहरण से लेकर अन्य जघन्य अपराध करने वाले बाबाओं का प्रभाव इस कदर बढ़ता जा रहा है कि आज जनता को तो छोड़िये, राजनेता, अभिनेताए अधिकारी, और बुद्धिजीवी वर्ग भी इनसे घबराने लगा है। आखिर इन बाबाओं के महाजाल का समाजशास्त्र क्या है? इनके पीछे जनता के भागने का अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान क्या है?एक सवाल यह भी कि आखिर ढोंगी बाबाओं से छुटकारा पाने के क्या उपाय हैं?