संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की एक नई रिपोर्ट कह रही है कि दुनियाभर में बाल मजदूरों की संख्या में 16 करोड़ नए बच्चों ने इजाफा किया है. यह बीते 4 दशक की सबसे बड़ी बढोत्तरी है. इसके पीछे दो कारण है. पहला, परिवार की आर्थिक स्थितियां खराब हो गईं हैं इसलिए अब परिवार का हर सदस्य अपनी क्षमता के हिसाब से काम की तलाश कर रहा है और दूसरा, स्कूल बंद हैं. और भला...मजदूर के आंगन में खेलता हुआ बच्चा कब किसे अच्छा लगा है.... सो उसे भी काम की आग में झोंका जा रहा है. दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद समेत कई महानगरों में बाल श्रमिकों की संख्या तेजी से बढ़ी है. जो चिंता का विषय होना चाहिए.दोस्तों --बाल मज़दूरी के बारे में आप क्या सोचते है ? -- आखिर क्यों हमें बाल मज़दूरी समाप्त करनी चाहिए ? -- आपके हिसाब से बाल मज़दूरी कारण है ? इस बारे में अपने विचार और अनुभव बताने के लिए अभी दबाएँ अपने फोन में नं 3 और रिकॉर्ड करें अपनी बात 

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कोविड की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही एक बार फिर से जो सवाल मुंह उठा रहा है वह है गरीब की थाली के भोजन का. सरकार ने एलान किया है कि गरीबों को दिवाली तक नि:शुल्क राशन दिया जाएगा पर सवाल ये है कि पुरानी व्यवस्था में भी बहुत से गरीब परिवार भूख से बिलखते रह गए। साथियों, अगर आप भी नि:शुल्क राशन पाने वालों की श्रेणी में आते हैं तो हमें बताएं कि क्या जब से कोविड ने देश में पांव पसारे हैं तब से आपको नियमित रूप से सरकारी राशन मिल रहा है? अगर नहीं तो डीलर राशन देने से मना क्यों कर रहे हैं? जो लोग नया राशन कार्ड बनवाना चाहते हैं क्या उन्हें राशन कार्ड बनवाने में दिक्कतें आ रही हैं? अगर दिक्कतें हैं तो वे क्या हैं और क्या इस बारे में प्रखंड आपूर्ति ​अधिकारी या जिला अधिकारी की लिखित रूप से शिकायत की है? सरकार राशन ना मिल पाने की स्थिति में आप कैसे अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं? क्या कोविड के दौरान आपके परिवार को या आपको राशन ना होने पर भूखे पेट सोना पडा है? अपनी बात हम तक पहुंचाने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3.

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