अक्षर अक्षर हमें सिखाते, शब्द शब्द का अर्थ बताते, कभी प्यार से कभी डांट से, जीवन जीना हमें सिखाते। छात्र व छात्र जीवन जी चुके लोग शिक्षक दिवस पर अपने शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। एक तरफ जहां माता-पिता बच्चे को जन्म देते हैं तो शिक्षक उनके जीवन को आकार देते हैं। समस्त मोबाइल वाणी परिवार की ओर से आप सभी श्रोताओं को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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दोस्तों, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय विकलांग पेंशन योजना की शुरूआत केन्द्र सरकार ने साल 2009 में की थी. इस योजना की देखरेख का जिम्मा केंद्र सरकार की अध्यक्षता में ग्रामीण विकास मंत्रालय के पास है. और मंत्रालय ने राज्यों के सामाजिक न्याय एवं नि:शक्‍तजन कल्‍याण विभाग के जिला और ब्लॉक स्तरीय कार्यालयों को ये जिम्मेदारी सौंपी है कि वे अपने क्षेत्र के जरूरतमंद दिव्यांगों को इस योजना का लाभ दिलवाएं. क्या आपके पास आवेदन करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं? अगर ऐसा है तो क्या गांव के मुखिया या फिर प्रखंड पदाधिकारी आपकी मदद कर रहे हैं? यदि आप राष्ट्रीय विकलांग पेंशन योजना का लाभ लेना चाहते हैं लेकिन उसमें दिक्कत आ रही है तो इसके बारे में हमसे बात कर सकते हैं.

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शहरों में ऑफिस दोबारा खोले जा रहे हैं लेकिन फिर भी यहां से जो छोटे—मोटे ठेले, पान की दुकानें गायब हुईं हैं वो अब भी खाली हैं. ट्रेनों में यात्रियों की भीड है पर इस भीड़ में चने—मूंगफली बेचने वाले नही हैं. क्या सोचा है आपने कि वे सब कहां गए? वे लोग जो गांव से निकलकर शहर आए थे और छोटा—मोटा रोजगार कर अपना और परिवार का पेट पाल रहे थे आखिर वे गए कहां? क्यों लॉकडाउन खुलने के बाद भी वे वापिस नहीं आए? आखिर क्या हुआ उनका? सरकार ने कोरोना राहत पैकेज के तहत स्वरोजगार करने वालों को बिना ब्याज के लोन सुविधा देने का एलान किया लेकिन फिर भी बहुत से लोग खुद को वापिस खड़ा नहीं कर पाए हैं? क्या ऐसा इसलिए है कि लोन लेने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि उन पर पहले से ही कर्ज बहुत ज्यादा है? क्या अब शहरों में इन छोटे रोजगार करने वालों की जरूर खत्म हो गई है? क्या शहरों की होटलों, ढाबों या दूसरे छोटे संस्थानों में मजदूरों की मांग कम हो गई है? अगर ऐसा है तो यहां काम करने वाले पुराने मजदूर अब कहां हैं? वे कैसे अपना जीवन यापन कर रहे हैं? अगर आप ऐसे किन्ही मजदूरों के बारे में जानते हैं तो हमें उनकी स्थिति के बारे में जरूर बताएं. अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3

दोस्तों, राजस्थान सरकार ने तो ये मसौदा तैयार कर श्रम कानून में बदलाव के सुझाव तैयार कर रखें और इसके लिए उनके पास अपना तर्क भी है लेकिन क्या आप इन सुझाव से सहमत हैं की 50% तक नियोक्ता द्वारा कटौती , काम के घंटे तय करना , ओवरटाइम के घंटे और अवकास के सुझाव को सही मानते हैं , आपकी क्या राय है , क्या इससे आप श्रमिकों की जिंदगी में आसानी आएगी या मामला और उलझन पैदा करेगा? काम करते हुए आपने इन समितियों और नियमों का पालन होते हुए आपने क्या पाया ???आप अपने सभी सुझाव रिकॉर्ड करें नंबर ३ दबाकर. याद रखें आप सुझाव और जवाब निति निर्माण में अहम् भूमिका अदा कर सकती है इसलिए आप जो सोचते हैं वो हम तक जरूर पहुंचाएं , रिकॉर्ड करें और सुनते रहें और जुड़ें मोबाइल वाणी की खास पहल के साथ

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