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मध्य प्रदेश के जिला छिंदवाड़ा से रविंद्र करमले मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि यदि शिक्षा का स्तर उठाना है ,तो हमें शिक्षक,विद्यार्थी,समाज,प्रशासन,शासन सभी को अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना होगा।यदि ऐसा हम नहीं करेंगे तो शिक्षा का स्तर कभी भी नहीं उठ सकता है।किसी एक को दोष देना उचित नहीं होगा हम सभी इसमें दोषी है।गिरते शिक्षा के स्तर में शिक्षक,विद्यार्थी,अभिभावक ,प्रशासन,शासन सभी भागीदार है।जब निरिक्षण का समय आता है तब शासन सिर्फ लेखा-जोखा देख लेता है।किसी छात्र से यह नहीं पूछा जाता है की आपको क्या पढ़ाये और क्या लिखाये ,अनुशासन क्या होता ,ये सारी बातें कोई सिखाता नहीं है और विद्यार्थी सीखना भी नहीं चाहते।शासन को ऐसे तरीके अपनाये जाने की जरुरत है,जिससे शिक्षक सही से अपना कार्य करे ,विद्यार्थी भी पढ़े और प्रशासन भी अपना नियमित रूप से कार्य करे।यदि ऐसा होता है तो निश्चित रूप से शिक्षा का स्तर उठेगा।
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छिंदवाड़ा से दिनकर पतुलकर जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि मूर्खता का प्रदर्शन है जादू टोना और तंत्र मन्त्र। दिनकर जी कहते है कि विश्वास पर भी विश्वास नहीं होता जब आज इस विज्ञानं के युग में अन्धविश्वास के कारन मूर्खता का प्रदर्शन के साथ आये दिन दर्शन होते रहते है। जादू टोना ,तंत्र मन्त्र मूर्खता का प्रदर्शन है। वास्तव में चमत्कार या जादू ,कुछ लोगों के लिए विज्ञान है। इसके पीछे विज्ञानं के रहस्य छुपे होते है। देखने में आ रहा है कि ग्रामीण आदिवासी अंचलों में साथ ही शिक्षित लोगों में भी चमत्कार और विश्वास पर अन्धविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका कारण यह है कि विश्वास ,ढोंगी ,तांत्रिक बाबाओं पर लोग विश्वास कर बैठते है और स्वयं तो दिशा भ्रमीत होते है साथ ही अपने पीछे पुरे परिवार को भी दिशा भ्रमीत करवाते है
