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सरकार कानून की किताब में बदलाव कर रही है, इसके लिए देश की संसद में बिल पेश कर दिया गया है। इसको बदलने का कारण अंग्रेजों द्वारा बनाया जाना है, लेकिन सब कुछ करने के बाद इससे हमारे-आपके जीवन में क्या बदलाव आएगा यह सवाल अभी से उठना शुरू हो गया है?
जलवायु की पुकार [श्रोताओं की सरगम] कार्यक्रम के अंतर्गत हम जानेंगे अलग अलग लोगों के योगदान के बारे में की कैसे पर्यावरण के समस्याओं का समाधान निकाला जा सके।
लाली मेरे लाल की जित देखूं तित लाल। लाली देखन मै गई मै भी हो गयी लाल। दिल्ली में बैठ कर INDIA is shinhing को अंग्रेजी में कहने से जनता और ज़ोर ज़ोर से नारा लगाने लगती है। शायद इसी टमाटर की वजह से हम विश्व की 5 वीं या तीसरी अर्थव्यवस्था भी बन जाए। कौन जानता है ? वैसे भी आजकल INDIA कहने से मामला कुछ गड़बड़ाता ही जा रहा है। अब इंडिया कहे या भारत , ये भी सवाल नया बन कर उभर रहा है। लेकिन इंडिया को छोड़ जो किसान हमारे भारत में रहते है , उन्हें तो टमाटर की लाली से कुछ खास फ़र्क़ नहीं पड़ रहा है। झारखण्ड राज्य की राजधानी रांची से तक़रीबन 100 किलोमीटर दूर बड़कागांव में हर रोज़ सुबह सुबह सब्ज़ी की मंडी लगती है। उस मंडी में पिछले 15 सालों से सब्ज़ी बेच रहे एक सब्ज़ी वाले ने बताया कि पिछले 15 सालों में उन्होंने टमाटर को कभी भी इतना महंगा नहीं देखा। पिछले 1 महीने से खुद उन्होंने टमाटर को चखा भी नहीं है। एक किसान बलराम महतो ने बताया कि वे तो 50 रु किलो के भाव से टमाटर बेच दे रहे है। बाकि सुनने में आ रहा है कि यहाँ से मात्र 30 किलोमीटर दूर हज़ारीबाग शहर में 250 के भाव से टमाटर बिक रहा है। पिछले दिनों किसान आंदोलन में हमारी सरकारी जनता ट्रैक्ट्रर चलाते और जींस पहले लोगो को किसान मानने को तैयार ही नहीं थी. और वही सरकारी जनता आज किसानो को टमाटर के बहाने जींस पहनाने में लगी है। बात साफ़ है कि कम्पनियों की सरकारों के प्रवक्ता.. देश को टमाटर कम्पनी बनाने के चक्कर में लगी हुई है। और हमें और आपको टमाटर के बहाने टमाटर ही बने रहना देना चाहती है। ताकि हम सोते जागते , उठते-बैठते टमाटर -टमाटर ही करते रहे. तो अब सवाल ये है कि टमाटर के भाव बढ़ जाते हैं तो किसान को इसका फायदा क्यों नहीं मिलता? क्योंकि सौ रुपये किलो के टमाटर में अस्सी रुपये बीच वाले खा लेते हैं। इस मुल्क में किसानों के नाम पर बहुत से लोगों को बहुत कुछ मिल जाता है। नोट वाले नोट ले जाते हैं, वोट वाले वोट ले जाते हैं, राज करने वाले राज करने लगते है और मुर्ख बनाने वालों को नए नए तरीके मिल जाते है। बात बस इतनी सी है कि अगर किसानो को फायदा मिलना शुरू हो जाएगा तो बीच के कई लोगों को घाटा हो जाएगा। तो साथियों, आप मुझे बताइए कि आपके यहाँ मॅहगाई के क्या हालात है ? इस महँगाई में गुज़ारा कैसे हो रहा है ? और आपको राजीव की डायरी कैसी लगी ? किन-किन मुद्दों पर आपने वाले वक़्त में बात करना चाहते है ? अपनी बात बताने के लिए अभी दबाएँ अपने फ़ोन में नंबर 3 का बटन और बताएं अपने विचार। नमस्कार
शोर... संसद से लेकर सड़क तक, गांव से लेकर शहर तक, इस शोर में गायब है उस जनता की आवाज जिसे अक्सर इमारतों में बैठने वाले भगवान कहते हैं? शोर चाहे जितना घना हो फ़र्क़ नहीं पड़ता , भीड़ कितनी ही घनी हो फ़र्क़ नहीं पड़ता, इस घने शोर और भीड़ के कोने से आरही हर एक आवाज जरूरी और अहम् होनी चाहिए। ऐसे ही किसी कोने से आती हर एक आवाज को उठाने के लिए मोबाइल वाणी ला रहा है एक नया कार्यक्रम ‘पक्ष-विपक्ष ’, 17 अगस्त से हर सोमवार और गुरुवार को हम लेकर आएंगे समाज के वो ज्वलंत मुद्दे जिन पर बात करना है बेहद ज़रूरी। चाहे आप मुद्दे के पक्ष में खड़े हों या विपक्ष में, मोबाइल वाणी के इस नए कार्यक्रम "पक्ष-विपक्ष" में अपनी बात ज़रूर रखे। तो इस समय आप के मुद्दे क्या है? अभी रिकॉर्ड करें नंबर ३ दबाकर या मोबाइल वाणी एप से ऐड का बटन दबाकर।
मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है रोजगार समाचार। यह नौकरी उन लोगों के लिए है जो दक्षिण भर्ती द्वारा असिस्टेंट लोको पायलट और टेक्नीशियन पदों पर वेतनमान नियमानुसार रूपए पर कार्य करने के लिए इच्छुक है । इन पदों के लिए सात सौ नब्बे रिक्तियां निकाली गयी है। इन पदों के लिए वैसे उम्मीदवार आवेदन कर सकते है जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय से दसवीं, बारहवीं, आई टी आई और डिप्लोमा की परीक्षा में उत्तीर्ण किया हो। इन पदों पर आवेदन करने के लिए अधिकतम आयु सीमा 42 वर्ष रखी गई है । आवेदनकर्ताओं का चयन सर्टिफिकेट सत्यापन, मेरिट सूची में प्रदर्शन के के आधार पर किया जाएगा। इन पदों पर आवेदन करने के लिए आवेदन शुल्क :सामान्य और ओ.बी.सी उम्मीदवारों के लिए निःशुल्क और एससी - एसटी, पी.डब्लू.डी और महिला के सभी उम्मीदवारों के लिए निःशुल्क रखा गया है।
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भारत में डॉक्टरों के लिए पहली बार इंटरनेट मीडिया दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इसमें राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने कहा है कि डॉक्टर इंटरनेट मीडिया पर मरीजों की जानकारी पोस्ट न करें। एनएमसी ने आरएमपी यानि रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर के लिए हाल ही में जारी पेशेवर आचरण संबंधी नियम में कहा है कि डॉक्टरों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इंटरनेट मीडिया पर लाइक, फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ में शामिल होने से बचना चाहिए।एनएमसी द्वारा दो अगस्त को अधिसूचित नियमों में कहा गया कि डॉक्टरों को इंटरनेट मीडिया पर मरीजों के इलाज की चर्चा नहीं करनी चाहिए।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
