भारत में हर पाँच मिनट पर घरेलू हिंसा की एक घटना रिपोर्ट की जाती है। नेशनल फैमिली हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार सख्त घरेलू हिंसा कानून- 2005 होने के बावजूद देश में हर तीन महिलाओं में से एक महिला घरेलू हिंसा की शिकार हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि 79.4% महिलाएं कभी अपने पति के जुल्मों की शिकायत ही नहीं करती। दोस्तों, हर रोज महिलाओं के खिलाफ जुर्म बढ़ रहे हैं , क्या अब हमारी संस्कृति को ठेस नहीं पहुंच रही , जिस पर इतने डींगे हाँकते है ? समाज में उत्पीड़न, शोषण और हिंसा का निरंतर बढ़ता ग्राफ अब बढ़ता ही जा रहा है। और जिस पर हमें अपनी चुप्पी तोड़नी ही होगी। हमें इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ उठानी ही होगी।
बाबा खास पीर के दरबार की चर्चाएं बहुत दूर तक है। बङी संख्या में यहां फरियादी अपनी मुराद लेकर पहुंचते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद लोग चादरपोशी भी करते हैं। शब ए बारात के मौका पर हर साल सिंहवाङा के बहुआरा बुजुर्ग गांव में बाबा खास पीर के दरबार में जलशा ए फैजाने शब ए बारात का आयोजन ग्रामीणों की ओर से होता है। इस वर्ष भी यहाँ सभी तरह की तैयारियां जोरों पर है।शुक्रवार को आजाद चौक स्थित बहुआरा बुजुर्ग गांव के नूरी जमा मस्जिद में ग्रामीणों की ओर से एक बैठक की गई। साफ-सफाई के अलावा बिजली , पानी आदि की व्यवस्था ग्रामीणों की ओर से की गई है। इस बैठक में बच्चे , वृद्ध , युवा सभी हुए शामिल। बाबा के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए हर साल यहाँ तैयारियां पूर्व से ही शुरू हो जाती है। रंग रोगन के अलावा गांव की गलियों को अभी युवाओं की ओर से दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। वहीं शब ए बारात की रात होने वाले जलशा ए फैजाने शब ए बारात में बिहार के अलावा दिल्ली , मुम्बई , आदि जगहों से कई मुस्लिम धर्मगुरु भी शामिल होंगे। अध्यक्षता करते हुए कारी मो० नेमतुल्लाह रजवी ने बताया कि यह एक खास पल है। इसमें हम सभी को अपने गुनाहों से माफी मांगना चाहिए। मीर मो० शहनवाज ने बताया बाबा खास पीर का दरबार शाम होते ही गुलजार हो जाता है। बङी संख्या में मुहम्मदपुर , दानी , सरवारा , सुंदरपुर , धरमपुर , मालपटृी , टेकटार कनौर सहित दूर दराज से लोग यहां पहुंचते हैं। रात भर बाबा खास पीर के दरबार में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। ग्रामीणों के बीच हर्षोल्लास का माहौल है। घरों में बनने वाले पकवानों को लेकर खरीदारी भी बाजारों में चल रही है। बाजारों में रंग बिरंगी मोमबत्ती सजी हुई है। अगरबत्ती आदि की भिनी भिनी खुशबू फिजाओं में रस घोल रही है। मौके पर मीर मो० शरफेआलम , मो० शफीअहमद , मो० जुबैर , मो० सलाउद्दीन , मीर अलीम , इर्तेजाउल कादरी , मो० तौफीक , आदि मौजूद रहे।
दोस्तों, हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। CTA: अगर आपके पास भी है कोई मज़ेदार चुटकुला, तो रिकॉर्ड करें मोबाइल वाणी पर, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर और जीतें आकर्षक इनाम।
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सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में।
हम सभी रोज़ाना स्वास्थ्य और बीमारियों से जुड़ी कई अफवाहें या गलत धारणाएं सुनते है। कई बार उन गलत बातों पर यकीन कर अपना भी लेते हैं। लेकिन अब हम जानेंगे उनकी हकीकत के बारे में, वो भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद से, कार्यक्रम सेहत की सच्चाई में। याद रखिए, हमारा उद्देश्य किसी बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि लोगों को उत्तम स्वास्थ्य के लिए जागरूक करना है। सेहत और बीमारी को लेकर अगर आपने भी कोई गलत बात या अफवाह सुनी है, तो फ़ोन में नंबर 3 दबाकर हमें ज़रूर बताएं। हम अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जानेंगे उन गलत बातों की वास्तविकता, कार्यक्रम सेहत की सच्चाई में।
जन्म से आठ साल की उम्र तक का समय बच्चों के विकास के लिए बहुत खास है। माता-पिता के रूप में जहाँ हम परवरिश की खूबियाँ सीखते हैं, वहीँ इन खूबियों का इस्तेमाल करके हम अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दे सकते है। श्रोताओं की क्या राय है, चलिए सुनते हैं। इस बारे में बचपन मनाओ... सुन रहे दूसरे साथियों को भी जानकारी दें। अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए दबाएं नंबर 3.
सुनिए एक प्यारी सी कहानी। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों की बोलने, सीखने और जानने की क्षमता बढ़ा सकते है।ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके बच्चे ने ये कहानी सुनी? इस कहानी से उसने कुछ सीखा? अगर आपके पास भी है कोई मज़ेदार कहानी, तो रिकॉर्ड करें फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।
आज की कड़ी में हम सुनेंगे सोशल मीडिया से फ़ोटो चोरी होने से सम्बंधित जोखिमों के बारे में जानकारी।
CRISIL के अनुसार 2022-23 में किसान को MSP देने में सरकार पर ₹21,000 करोड़ का अतिरिक्त भार आता, जो कुल बजट का मात्र 0.4% है। जिस देश में ₹14 लाख करोड़ के बैंक लोन माफ कर दिए गए हों, ₹1.8 लाख करोड़ कॉर्पोरेट टैक्स में छूट दी गई हो, वहां किसान पर थोड़ा सा खर्च भी इनकी आंखों को क्यों खटक रहा है? आप इस पर क्या सोचते है ? इस मसले को सुनने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें
