नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका मोबाइल वाणी मंच पर | जहाँ हम शुरू कर रहे है बदलाव का आगाज़, यानी की बदलाव का पहला कदम | बस वो पहला कदम कब, कैसे और क्यों उठे, ये समझने के लिए बातचीत करने आये है हम | पूरी दुनिया में लोग हिंसा के खिलाफ सक्रियता को लेकर अभियान चला रहे है | चर्चा कर रहे है, बात कर रहे है | तो मोबाइल वाणी पर हम उनसे बात करेंगे जिन्होंने हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठाई, सवाल किये,संघर्ष किया, कभी पूरा जीते तो कभी थोड़ा। दोस्तों, आइए इन 16 दिनों में हम और आप मिलकर बदलाव की इबादत लिखें.. कदम बढ़ाये एक बेहतर कल की ओर.. एक ऐसा समाज बनाने में अपनी भूमिका निभाएं जहां लोग रंग रूप, अमीर गरीब, महिला पुरुष या किसी भी लिंग पर गौर किए बिना एक साथ खुशी से जीवन जिएं..
सुनिए एक प्यारी सी कहानी। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों की बोलने, सीखने और जानने की समझ बढ़ा सकते है। ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके बच्चे ने ये कहानी सुनी? इस कहानी से उसने कुछ सीखा? क्या आपके पास भी कोई नन्ही कहानी है? हमें बताइए, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।
जन्म से आठ साल की उम्र तक का समय बच्चों के विकास के लिए बहुत खास है। माता-पिता के रूप में जहाँ हम परवरिश की खूबियाँ सीखते हैं, वहीँ इन खूबियों का इस्तेमाल करके हम अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दे सकते है। आप अपने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ाने और उन्हें सीखाने के लिए क्या-क्या तरीके अपनाते है? इस बारे में बचपन मनाओ सुन रहे दूसरे साथियों को भी जानकारी दें। अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए दबाएं नंबर 3.
चलिए सुनते हैं बड़ों के गुस्से का बच्चों पर असर। क्या आप जानते है कि गुस्से से नहीं बल्कि शांत रहकर ही हम बच्चे का व्यवहार सही रख सकते है। धैर्य से काम लेंगे तो हमारे साथ बच्चों का रिश्ता मीठा होता चला जाएगा। कार्यक्रम सुनिए और अपने नन्हे-मुन्नों के अनुभवों को रिकॉर्ड कीजिये, फ़ोन में नंबर 3 दबाकर।
कुल्फी फालूदा, रबड़ी फालूदा, केसर फालूदा जैसे और जाने कितने ही स्वाद हैं इस फालूदा के... तो क्यों ना आ आप जानें इस फालूदा के भारत में आने की कहानी? जल्दी से क्लिक कीजिए और अभी सुनिए.
सुनिए एक प्यारी सी कहानी। ये कहानी आपके लिए लेकर आएं है प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, जिसे सुना रहे है नन्हें-मुन्ने युग शाह। ये कहानी बच्चों को भी सुनाएं और देखिए कि उनकी कौनसी भावनाएं नज़र आती है। फ़ोन में नंबर 3 दबाकर अपने नन्हे-मुन्नों से जुड़ी कहानियां ज़रूर रिकॉर्ड करें, और मनाते रहें बचपन का ये त्यौहार...
14 नवम्बर से 20 नवंबर तक कुटुकी और मोबाइलवाणी मना रहे हैं 'बाल दिवस स्पेशल'। इस अवसर पर 'बचपन मनाओ, बढ़ते जाओ' अभियान के तहत बच्चों को वर्णमाला सिखाने के लिए शुरू हुई है एक नई सीरीज। इसे आप अपने बच्चों को जरुर सुनाएं। साथ ही हमें बताएं कि आप बच्चों को वर्णमाला कैसे सिखाते हैं? कोई कविता सुनाते हैं या गाना गाकर? और अगर आप बच्चों को सिखाने के लिए ऐसी ही प्यारी-प्यारी सी कविताएं बनाते हैं तो उसे मोबाइलवाणी पर रिकॉर्ड भी करें, ताकि बाकी बच्चे भी इसे सुनें और सीखें। अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3।
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ये लिंग का भेद जिस दिन समाज से जायेगा, तब यहाँ रहने वाले हर एक लोग इंसान कहलाएगा।बदलाव के इस खूबसूरत सफर में आप भी हिस्सा लें लिंग और जेंडर के नाम पर होने वाले भेद-भाव और हिंसा पर अगर आपकी भी कोई कहानी है, तो देर मत कीजिये अपनी आवाज बुलंद कीजिये और अभी रिकॉर्ड कीजिये मोबाइल वाणी के साथ।
नदी की साँसें लौट आई हैं... सूर्य का तेज और तेज हो रहा है... प्रकृति की पूजा का अनूठा पर्व छठ... शुरु हो चुका है. दोस्तों आप सभी को छठ महापर्व की शुभकामनाएं.. इस त्यौहार से जुड़ी आपके पास बहुत सारी कहानियां होंगी... बचपन के किस्से होंगे, गीते होंगे.. यादें होंगी... क्यों ना इस बार मोबाइलवाणी के मंच पर उन सभी किस्सों, कहानियों, यादों को समेंटा जाए... कुछ रिकॉर्ड किया जाए... कुछ ऐसा जो लोगों को प्रेरणा दें, साहस दे, ज्ञान दे... और साथ ही साथ मनोरंजन भी. चलिए तो फिर जल्दी से फोन में नम्बर 3 का बटन दबाइए और रिकॉर्ड कीजिए छठ से जुड़ा आपका सबसे अच्छा पल, सबसे पंसदीदा गीत या फिर कहानी..
