भाटपार रानी,देवरिया: लार विकास खंड के माधोपुर गांव में सोशल ऑडिट टीम की बैठक जिम्मेदार अधिकारियों की देखरेख में हुई । इस दौरान दर्जनों की संख्या में ग्रामीणों की उपस्थित रहीं। सोशल ऑडिट में अधिकारियों ने बताया की गावों में हुए विकास कार्यों का सर्वे किया जा रहा हैं। ताकि गावों का सर्वांगरीय विकास हो सके इसी को ध्यान में रखते हुए सोशल ऑडिट की बैठक हुई है। इस दौरान ब्लाक कोऑर्डिनेटर व अन्य सोशल ऑडिट सदस्यों के साथ-साथ ग्राम प्रधान व जिम्मेदारगण मौके पर मौजूद रहे।

देवरिया जनपद के ब्लॉक भटनी के रहने वाली माधुरी देवी पत्नी राजेश साहनी लगभग 20 दिन से गुहार लगाती आ रही है कि मैं जिंदा हूं हालांकि अपने ही हाथ में अपना मृत्यु प्रमाण पत्र लेकर अधिकारियों को यह बता रही है कि मैं जिंदा हूं। बरहाल यह पूरा मामला एक कोटा की दुकान को लेकर है जहां माधुरी के पति राजेश साहनी ने अपने भाई के साथ मिलकर अपनी ही पत्नी को मृत्यु घोषित कर दिया और कोटा को अपने नाम कर लिया महिला लगातार 20 दिनों से अधिकारियों के चक्कर लगा रही है और यह बताने की कोशिश कर रही है मैं जिंदा हूं और मुझे मेरा कोटा मेरे नाम से वापस किया जाए

देवरिया जनपद का बरपार गांव जहां जागृति रेल यात्रा आज कई पड़ाव को पार करते हुए बरपार गांव पहुंची और यात्रा पहुंचने के बाद गांव में एक वृहद कार्यक्रम हुआ।इस रेल यात्रा में कुल पांच 500 मेंबर है जो भारत 24 राज्य और 20 देश के छात्र-छात्राएं है।20 देश से कई विदेशी मेहमान भी इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रहे हैं।जागृति रेल यात्रा के आयोजक शशांक मणि त्रिपाठी ने बताया कि इस रेल यात्रा का यह उद्देश्य है कि भारत के पिछड़े जिलों को उद्यम के क्षेत्र के साथ कैसे बढ़ावा दिया जाए इसको लेकर या रेल यात्रा चलाई जा रही है।

भाटपार रानी,देवरिया: कृषि विज्ञान केंद्र मल्हना में मंगलवार को किसानों को जागरुक करने के लिए सस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ० कमलेश मीना द्वारा कीटनाशकों का सुरक्षित एवं समुचित उपयोग विषय पर तीन दिवसीय ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ० मांधाता सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ० सिंह द्वारा किसानों को अपने संबोधन में बताया गया कि कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग करने से दिन-प्रतिदिन हमारे खेत की मिट्टी,पर्यावरण एवं जीवों के स्वास्थ्य पर विपरीत एवं हानिकारक प्रभाव पड़ रहे हैं। उन्होंने आगे बताया की वर्तमान समय में अनेकों बीमारियां जैसे कैंसर,दिल का दौरा,रक्त संचार आदि खान-पान में रसायनिक पदार्थ की मात्रा के बढ़ने से उत्पन्न हो रही है। इसलिए किसानों को रसायनिक दवाओं एवं उर्वरकों का कम से कम मात्रा में प्रयोग करना चाहिए। इस अवसर पर उद्यान विज्ञान विशेषज्ञ डॉ० रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान समय में किसान भाई सब्जियों में कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग कर रहे हैं जो मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारे मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए भी घातक होता है। किसानों को सब्जियों में इन कीटनाशकों की अपेक्षा जैविक कीटनाशकों का अधिक से अधिक प्रयोग करें। डॉ० कमलेश मीना ने किसानों को बताया की कुछ कीटनाशक, खरपतवारनाशक एवं फफुंदीनाशक जो हमारी जैवविविधाता के लिए घातक दवाओं को खेती में प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रतिबंधित कीटनाशकों को फसलों में किसी भी रूप में प्रयोग नहीं करना चाहिए। कीटनाशकों का प्रयोग करते समय इस बात का ध्यान रखें की वैज्ञानिकों द्वारा जितनी मात्रा संस्तुत की गई है उतनी ही मात्रा का प्रयोग करें,अधिक मात्रा का प्रयोग घातक होता है। डॉ० मीना ने आगे बताया की छिड़काव करते समय हाथों में दस्ताने, मुंह पर मास्क पहन कर ही छिड़काव करें। जब हवा का प्रवाह नहीं हो तब ही छिड़काव करना अधिक लाभकारी होता है। इन रसायनों का अत्यधिक प्रयोग से मृदा में उपस्थित सूक्ष्म जीवों के स्वास्थ्य, संख्या के साथ-साथ मृदा में उपस्थित जीवाश्म पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस अवसर पर फार्म प्रबंधक श्री अजय तिवारी द्वारा किसानों को अपने संबोधन में बताया की कीटनाशकों का सुरक्षित एवं संतुलित मात्रा में प्रयोग नहीं करने से फसलोत्पादन पर हानिकारक प्रभाव देखा गया है। प्रशिक्षण के दौरान जीपीएस सोसाइटी गोरखपुर एवम प्रदिपात स्टार्टप द्वारा किसानों को ड्रोन के द्वारा खड़ी फसल में कीटनाशकों एवं तरल उर्वरकों के प्रयोग का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर राहुल कुमार, अमित कुमार, मनजीत कुमार कुशवाहा, अनूप सिंह, कंचन लता, विशिष्ट मिश्रा, चन्द्रदेव यादव आदि सहित 50 प्रशिक्षणार्थी ऑनलाइन एंड ऑफलाइन उपस्थित रहे।

भाटपार रानी ,देवरिया: संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वाहन पर अखिल भारतीय किसान सभा के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने भाटपार रानी तहसील परिसर में प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार चंद्रशेखर वर्मा को सौंपा। ज्ञापन में कहां की बीते वर्षों कृषि कानूनों के खिलाफ़ किसान आंदोलन के समर्थन में लिखने वाले पत्रकारों पर यूएपीए के तहत एफआईआर दर्ज करना लोकतंत्र के खिलाफ है।

मौना से लेकर देऊवारी को जोड़ने वाली सड़क बनने के साथ ही उजड़ गई

देवरिया: नगर पंचायत भाटपार रानी के नगर पंचायत व ग्रामीण क्षेत्रों में रोशनी के लिए हाई मास्ट व स्ट्रीट लाइटें लगाई गई है। जिससे रात के समय लोगों को आने-जाने में परेशानी न हो। भाटपार रानी नगर में जहां सैकड़ों लाइट इस समय दिन में भी जल रहे हैं तो वही ग्रामीण क्षेत्रों में भी लाइटों के जलने से प्रत्येक रोज हजारों यूनिट बिजली की बर्बादी हो रही है।जिसको लेकर लोगों द्वारा विद्युत विभाग के कर्मचारियों को अवगत कराया गया हैं।इसके बावजूद भी बिजली खपत को लेकर अनदेखी की जा रही हैं।

देवरिया: लार विकास खण्ड के ग्राम पंचायत बभनौली के खारीडीह गांव में मनरेगा योजना के तहत शुरू हुए काम को लेकर मनरेगा मजदूरों के चेहरे पर एक बार फिर मुस्कान लौटने का काम किया है। इस योजना के तहत सभी मनरेगा श्रमिकों को रोजगार दिया गया है। जिसमे मनरेगा श्रमिक खारीड़ीह गांव की कच्ची सड़क के निर्माण कार्य में जुटे हुए है।रोजगार सेवक अवधेश कुशवाहा व ग्राम प्रधान सतीश वर्मा ने बताया की अब पुनः मनरेगा श्रमिकों को 90 दिनों का काम मिलना शुरू हो जायेगा।जिससे जहां मनरेगा श्रमिकों के साथ साथ बाल बच्चों का भी भरण पोषण होगा तो वही मनरेगा योजना के तहत जरूरतमंदों को रोजगार के अवसर प्राप्त होगे और ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।

देवरिया :लार विकासखंड के ग्राम पंचायत बभनौली की बात करें तो इस समय नाली का निर्माण स्वच्छ भारत मिशन के सपने को साकार करने के लिए किया जा रहा है।ताकि प्रत्येक घरों से जल निकासी की सुदृढ़ व्यवस्था हो जाए और ग्रामीण को सुविधा मिले। लेकिन वर्तमान में जिस नाली का निर्माण हो रहा है वह मानक विहीन है। आपको बता दे कि बभनौली गांव निवासी फिरोज़ सिद्धिकी के घर के पास से होते हुए ताजिया वाले चौक के रास्ते इद्रीश के मकान तक बनाए जा रहे नाली में बहुत सारी कमियों को देखा गया हैं। निर्माण कार्य की बात करे तो जहां एक तरफ कमजोर ईट प्रयोग हुआ है तो वही जो सिल्लापट्ट नालियों के ऊपर रखे जा रहे है वह कुछ क्रेक पाए जा रहे है।जिससे नाली के निमार्ण कार्य पूर्ण हो जाने के बाद अगर प्रत्येक घरों से नालियों का बहाव शुरू किया जायेगा तो एक तरफ जहां जल जमाव की समस्या होगी तो वही कचड़ों का भी अंबार लगा रहेगा।जिससे ग्रामीणों को संक्रमण बिमारिया भी हो सकती है।इस मुद्दे पर कुछ लोगों द्वारा जिम्मेदारों से कई बार शिकायत की जा चुकी है लेकिन ज़िम्मेदार मौन है।

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