भाटपार रानी देवरिया। अष्टम् आयुर्वेद दिवस के अवसर पर भाटपार रानी क्षेत्र के खामपार में स्थित 50 शैय्या आयुष चिकित्सालय में आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि जयंती मनाई गई जिसमें कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्वांचल विकास बोर्ड के सदस्य राजकुमार शाही और चिकित्सा अधीक्षक डा.विनोद कुमार यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर, भगवान धन्वंतरि जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर देशवासियों के स्वस्थ व निरोगी जीवन की कामना की। राजकुमार शाही ने कहा कि आयुर्वेद हमें हजारों वर्षों से स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखा रहा है। प्राचीन भारत में आयुर्वेद को रोगों के उपचार और स्वस्थ जीवनशैली व्यतीत करने के तरीकों में से एक माना जाता था। आयुष चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डा.विनोद कुमार यादव ने कहा कि -आयुर्वेद स्वस्थ व सुखद जीवन का वरदान है।आयुर्(जीवन) और वेद(ज्ञान) का मर्म ही उत्तम जीवन की आधारशिला है। आयुर्वेद प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति की द्योतक है, जिसमें प्रकृति प्रदत्त वानस्पतिक का उपयोग निरोगी काया प्रदान करने में सहायक होता है। भौतिक परिवेश और वानस्पतिक समावेश का समन्वय ही आयुर्वेद है। आयुर्वेद मूलतः तीन प्रकार के ऊर्जा या कार्यात्मक सिद्धांतों की पहचान करता है, जो हर किसी इंसान और हर चीज में मौजूद है।इसे त्रिदोष सिद्धांत कहते हैं।जब ऐ तीनों दोष -कफ,पीत और वात सन्तुलित रहते हैं तो शरीर स्वस्थ रहता है। असंतुलन की अवस्था में नाना प्रकार के रोग से व्यक्ति ग्रसित हो जाता है। प्रकृति ने भौगोलिक और पर्यावरणीय विभिन्नता के अनुसार ही प्रकृति ने विभिन्न प्रकार की औषधियों की श्रृंखला प्रदान कर सहचर मनुष्य और जीवों को परिपोषित किया है।इस बदलते मौसम के अनुसार संक्रामक दौर में प्रकृति प्रदत्त औषधीय गुणों वाले - आंवला, तुलसी,बथुआ, हल्दी,काली मिर्च और आदी आदि उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करते हैं। डा.मनीष कुमार मल्लिक ने कहा कि - स्वस्थस्य स्वस्थ्य रक्षणम्, अतुर रस्य विकार प्रशमन:च।। यानी स्वस्थ व्यक्ति को स्वस्थ रखा जाय, और रोगी व्यक्ति को स्वस्थ किया जाय, यही हम सभी का मूल लक्ष्य है।यह अस्पताल सेवा और समर्पण की नित नई इबारत लिख रहा है। उक्त अवसर पर मिशन ग्रामोदय के संचालक जगरनाथ यादव ने कहा कि - आयुर्वेद प्रकृति का अनूठा वरदान है जो जीव को उत्तम जीवन जीने कला प्रदान करता है। प्रकृति ने जीवों के स्वास्थ्य लाभ हेतु भौगोलिक और पर्यावरणीय पारिस्थैतिकी के अनुसार असंख्य औषधीय पादप श्रृंखला प्रदान की है। निरोगी काया को पुष्ट करती आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति ने मौसमानुसार -फल,फूल,बीज,पत्ती और तना से मनुष्य को लाभान्वित करती रही है।
