अनीष्का मौर्य आजमगढ़ मोबाइल वानी से बोल रहे हैं आगाज़ हुआ तो यकीनन आज भी होगा कविता आगाज़ हुआ तो यकीनन आज भी हुआ है तो यकीनन आज भी हुआ है । स्वानियों का काम भी किया जाएगा । हमने उम्मीदों पर अपनी यात्रा जारी रखी । हमारे पास राम में कहीं मंजिल और मकाम भी होंगे । ये काफिले हमेशा अंधेरे के साथ नहीं होते हैं । हां सुबह ए शहर और वक्त करिश्मा भी होगा माफियों का तरीका अक्सर शादी है कहीं पे तो अरमानों का हिम्मत भी होगा हम इस बात पर सहमत थे । वे मेरी सड़क से नफरत करते हैं , लेकिन शहर में कहीं न कहीं उनका भी विनाश होगा । होगा अब तो दरिया एक उर्सत में बाहर गए हैं हम साहिल के साथ कहीं दिल नकाम भी होगा मेरे ये रकम दर्द ने दरते है आज के जिंदगी लिए दवाएं भी और व्यवस्था होगा ।
प्रोटीन की कमी से शरीर की वृद्धि रुक जाती है।
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