महिलाओं की कविता सुबह होती है , शाम होती है , बुढ़ापे में होती है , अँधेरी रातों में हम खुद को इतना नहीं पाते हैं । ऐसा न होने का नुकसान होता है कि सुबह होती है , फिर वह टूट जाती है , खोया हुआ जीवन उगता है , चलता है , नई सांसों के साथ बढ़ता है , नया आराम , सुबह भी नई होती है । जैसा कि एक नई शाम की खोज भी है , एक शाम जो अपनी तरह ही खास है , और एक सुरम्य जूकून । खदीर बेईं थाईपाई । कोई और एक दूर का सितारा ।
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उत्तरप्रदेश राज्य के आजमगढ़ जिले की आर्य ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया है की फूलपुर के , पशुतुकवा गांव में सैकड़ों घरों के लोगों को सुबह - शाम नाले से गंदा पानी फेंकना पड़ता है जिसकी वजह से सभी परेशान है।
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