प्रगतिशील युग इस युग का समय उन्नीस सौ अड़तीस से उन्नीस सौ अड़तालीस तक था । इस युग में सहज व्यावहारिक और अलंकृत गद्य के लिए एक प्रतिष्ठा देखी गई । अब गद्य में भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए जगह उस युग के प्रमुख लेखकों द्वारा ताजा प्रकाशित और मजाकिया उद्धरणों द्वारा प्रतिस्थापित की गई थी ।