South ke liye Gaye yuvak per Bhagh ka hamla

मृतक की साइकिल घटनास्थल से करीब 150 मीटर दूर ग्राम भगौतीपुर मोड़ के पास मिली। मृतक के परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। उधर, चौकी पुलिस ने जीआरपी को सूचित कर शव को पीएम के लिए भेजा है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मौत का कारण ट्रेन से टकराना लग रहा है। अभी तहरीर नहीं मिली है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का पता चल सकेगा।

ओयल। चौकी क्षेत्र अंतर्गत रेलवे ट्रैक के पास सुबह एक अधेड़ का शव मिला। राहगीरों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव की शिनाख्त श्याम किशोर अवस्थी (60) पुत्र संतबक्श निवासी मोतीपुर ओयल थाना खीरी के रूप में की। मृतक के परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है।

लखीमपुर खीरी/फरधान। रेलवे ने रविवार सुबह फरधान क्रॉसिंग पर काम शुरू करा दिया। इससे नेशनल हाईवे पर वाहनों का आवागमन बंद हो गया। ऐसे में अन्य वाहनों से लेकर रोडवेज बसों को सिकंदराबाद होकर निकाला गया, जिससे रविवार को दिन भर सिकंदराबाद कस्बे में जाम लगता रहा। चौकी पुलिस दिन भर जाम खुलवाने के लिए जूझती रही।

शनिवार शाम मंजीत से मोबाइल पर बात होने के बाद कोई संपर्क नहीं होने से परिवार वालों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। सुरंग के अंदर उत्तरकाशी में 41 मजदूरों के साथ मंजीत भी फंसा है। मंजीत की मां चौधराइन बताती हैं कि बेटे मंजीत से शनिवार शाम को बेटे ने बताया था की अभी दो-तीन दिन और लगेंगे। फोन पर आवाज सुनकर तो मन खुश हुआ, लेकिन सुरंग का काम बंद होने से चिंता फिर बढ़ गई है।

लखीमपुर खीरी के हैदराबाद थाना और मोहम्मदी रेंज क्षेत्र के बेलवा गांव के बाहर सोमवार सुबह नहर पटरी पर ग्रामीण को बाघ ने मार डाला। ग्रामीण शौच के लिए गया था। इसी दौरान उस पर बाघ ने हमला कर दिया। पुलिस ने उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

पक्ष विपक्ष आवारा पशुओं एवं जंगली जानवरों पर रोकथाम के लिए सरकार को जरूरी कदम उठाने होंगे क्योंकि यह बहुत ही आवश्यक है जब अन्नदाता किसान के यहां जब अनाज ही नहीं होगा तो आम जनता क्या खायेगी हम सब भूख से मरने लगेंगे और महंगाई भी बहुत बढ़ जाएगी

स्कूल में पढ़ने और पढानें वाले दोनों ही पक्ष शिक्षा के गिरते स्तर के लिए जिम्मेदार हैं। पढ़ने वालों के मन में फेल होने का डर नहीं है,परिवार में पढाई के प्रति संज़ीदगी का माहौल नहीं है।दोपहर के भोजन का लालच दे कर उन्हें स्कूल बुलाया जाता है या फिर सस्ते राशन का लालच देकर।मार खाने से भी इनको डर नहीं लगता क्योंकि घर पर भी छोटी -छोटी बातों पर ये मार खाते ही रहते हैं। कुछ सीखने या याद करने की जगह दो तमाचे खाना ठीक लगता है इनको,ऊपर से यदि कहीं छोटा मोटा काम करके पैसे मिलने शुरू हो जाएं तब तो यह लोग बिल्कुल ही नहीं पढते( क्योकि मां बाप घर में यही तो कहते रहते हैं कि पढ ले तभी तो चार पैसे कमा पाएगा,तो वो चार पैसे तो अभी ही मिल रहे हैं)।

सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई का लेवल गिरने का एक महत्वपूर्ण कारण विज्ञार्थी द्वारा फीस न लेना है इसके अतिरिक्त सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले मास्टर जी भी बच्चो पर ध्यान नहीं देते है , जिससे सरकारी स्कूल के बच्चे ज्यादा ध्यान नहीं देते है , और सरकारी स्कूल के टीचर्स को बच्चो को पड़ने के लिए कोई प्रेसर नहीं होता हैं , जिससे वो न समय पर आते है न समय पर जाते है , इससे वह का वातावरण निरंतर बिगड़ता रहता है , तथा यह मान्यता बन जाती है की सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती है | और वास्तविकता में सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती | विज्ञार्थी द्वारा फीस न लेना से विज्ञार्थी के पेरेंट्स पर शिक्षकों को विज्ञार्थी की पढाई किसी चल रही है आदि पूछने का कोई वजूद नहीं रहता हालंकि वे पूछ सकते है लेकिन वे फीस के आभाव के कारन नहीं पूछते है यही कारण है की सरकारी विद्यालयो में पढ़ाई का अस्तर कम हो रहा है

पक्ष विपक्ष आवारा पशुओं एवं जंगली जानवरों पर रोकथाम के लिए सरकार को जरूरी कदम उठाने होंगे क्योंकि यह बहुत ही आवश्यक है जब अन्नदाता किसान के यहां जब अनाज ही नहीं होगा तो आम जनता क्या खायेगी हम सब भूख से मरने लगेंगे और महंगाई भी बहुत बढ़ जाएगी