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विकासखंड कछौना में बुधवार को जिला विकास अधिकारी अरविंद कुमार ने निरीक्षण किया। अधीनस्थ कर्मचारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। बताते चलें बुधवार को जिला विकास अधिकारी अरविंद कुमार ने निरीक्षण के दौरान ब्लाक के आवश्यक अभिलेख सर्विस बुक, जीपीएफ व स्थापन पंजिका, गार्ड फाइल, निरीक्षण पंजिका, भूमि भवन पंजिका, उपस्थिति पंजिका, ग्राट रजिस्टर आदि अभिलेखों का अवलोकन किया। ब्लॉक परिसर में सभी पटलों का निरीक्षण किया। पटल कर्मचारी से जानकारी ली। एडीओ पंचायत कार्यालय का निरीक्षण किया कक्ष की जर्जर हालत, फाइलों का उचित रखरखाव न होने पर दुरुस्त करने का निर्देश दिया। सभागार का निरीक्षण के दौरान टूटे दरवाजे को तत्काल ठीक करने का निर्देश दिया। ब्लॉक परिसर का निरीक्षण के दौरान ट्री-गार्ड को सही कराने का निर्देश दिया, ट्री-गार्ड से पेड़ गायब थे, ईंटे गिर चुकी थी, प्रांगण में गंदगी का अंबार था। सामुदायिक शौचालय में ताला लटका था, परिसर में लगा इंडिया मार्का नल की मशीन नहीं बनी थी। इन समस्याओं के विषय में खंड विकास अधिकारी मानवेंद्र शर्मा ने बताया यह क्षेत्र पंचायत से बना है। इसे ग्राम पंचायत को हैंडओवर करके केयरटेकर की नियुक्ति कराकर सुचारू रूप से चालू कराया जाएगा। पंचायत भवन पतसेनी देहात का निरीक्षण किया, व्यवस्थाएं देखकर ग्राम सचिव संतोष कुमार की सराहना की। इस निरीक्षण के दौरान खंड विकास अधिकारी मानवेंद्र शर्मा, एडीओ पंचायत अरविंद कुमार, एडीओ आईएसबी राजेंद्र नाथ, वरिष्ठ सहायक विकास द्विवेदी, माला देवी, कर्मी, ग्राम सचिव संतोष कुमार सहित ग्राम सचिव/पंचायत सचिव मौजूद रहे।
कछौना, हरदोई* नगर पंचायत कुरसठ कस्बे में कबड्डी/दौड़ प्रतियोगिता का अयोजन जय हिन्द द्वारा कराया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी डा. नृपेन्द्र वर्मा "वर्मा हॉस्पिटल के संचालक व विशिष्ठ अतिथि के रूप में गरीब बेरोजगार सेवा फाउंडेशन की संस्थापक डा.काजल वर्मा" ने फीता काटकर कबड्डी व दौड़ प्रतियोगिता का शुभारंभ किया।
ब्लॉक सभागार मे उमंग सुनहरा कल सेवा समिति एवं एच सी एल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में चलाया जा रहे कार्यक्रम तालाबों का जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण परियोजना के तहत आज ब्लॉक स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन विकासखंड कोथावां में किया गया जिसमें ग्राम प्रधान गोविंदपुर ,ग्राम पंचायत सचिव जरौआ एवं परियोजना द्वारा चयनित चारों गांव के डब्लूयूजी मेंबर और ग्रामीण उपस्थित रहे।
चतरा को झारखण्ड या छोटा नागपुर का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। 1857 के विद्रोह के दौरान छोटानागपुर में विद्रोहियों और ब्रिटिशों के बीच लड़ा जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई ‘चतरा की लड़ाई’ थी। चतरा झारखंड राज्य की राजधानी से रांची जिले से करीब 124 किलोमीटर दूर है। चतरा में आप सड़क माध्यम के द्वारा पहुंच सकते है। और क्या क्या घूमने लायक है चतरा ज़िले में , ये जानने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें।
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पुस्तकालय और कंप्यूटर लैब की रखी आधारशिला
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