विकास खंड संडीला के गोपालपुर गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक प.कौशल किशोर ने भक्त प्रहलाद और भक्त धु्रव की कथा का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान की लीला का कोई भी पार नहीं पा पाया है। इस संसार में राजा हिरणाकश्यप हुए उसने अपने को ईश्वर घोषित किया, लेकिन उसके ही घर में बालक के रूप में प्रह्लाद ने जन्म लेकर अपने पिता को ईश्वर मानने से मना कर दिया। तमाम परीक्षणों से गुजरने के बाद सिंह का रूप धर कर स्वयं भगवान ने आकर हिरणाकश्यप का वध कर दिया। इसी प्रकार भक्त धु्रव ने भी भगवान की भक्ति में लीन रहकर उस प्रकाश को पा लिया, जिसे पाने के लिए लोग पूरा जीवन तपस्या में लगा देते हैं। कथा का सार है कि भगवान अंतर्यामी हैं, वह सब कुछ देखता व जानता है। ईश्वर का जाप करने वाले पर आई मुसीबत को स्वयं ईश्वर आकर मदद करता है। इस मौके पर रामकुमार अनुज लवलेश,सावले,गोरे,मुन्नू,हरिनाथ नेहा,सलोनी मौजूद रहे।