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उत्तरप्रदेश राज्य के बाराबंकी जिला से गीतांजलि श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही हैं कि चुप रहने का अर्थ है घरेलू हिंसा को समाप्त करने के लिए हिंसा को बढ़ावा देना । बोलना बहुत जरूरी है । लड़कियों को बचपन से ही सिखाया जाता है कि घर की बात घर में रखें और बाहर न कहें । यहां तक कि शिक्षित लड़कियां भी अक्सर घरेलू हिंसा का शिकार हो जाती हैं । क्योंकि उन्हें सिखाया जाता है कि अगर आप बाहर कुछ कहते हैं , तो लोग आपको गलत समझेंगे , इसलिए चुप रहना ही सही है और यह गलत बात है । घरेलू हिंसा बढ़ रही है और जो लोग यह राय देते हैं वे अनिवार्य रूप से साक्षर नहीं हैं क्योंकि सभी महिलाएं साक्षर नहीं हैं , कुछ साक्षर हैं , कुछ अधिक और कुछ कम हैं । यदि घरेलू हिंसा को ठीक करना है , तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि सभी लड़कियों और महिलाओं को शिक्षित किया जाए क्योंकि शिक्षा से मानसिक विकास होता है और परिवार की मानसिकता में बदलाव आता है । अगर बड़ी महिला शिक्षित होगी , तो उसके पास अन्य विचार होंगे और वह अपने घर की लड़कियों को सही राय दे पाएगी और वह हमेशा अपने बच्चों को पढ़ाएगी ।

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"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिलदेव शर्मा रसों फसल की कटाई कब करे इस बारे में जानकारी दे रहे हैं । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें

बाराबंकी मोबाइल वाणी पर सुनिए आज का अनाज मंडी भाव।

दोस्तों, हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानि की NCRB के हालिया रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में 23,178 गृहिणियों ने आत्महत्या की थी। यानी देशभर में हर दिन 63 और लगभग हर 22 से 25 मिनट में एक आत्महत्या हुई है। जबकि साल 2020 में ये आंकड़ा 22,372 था। जितनी तेज़ी से संसद का निर्माण करवाया, सांसद और विधायक अपनी पेंशन बढ़ा लेते है , क्यों नहीं उतनी ही तेज़ी से घरेलु हिंसा के खिलाफ सरकार कानून बना पाती है। खैर, हालत हमें ही बदलना होगा और हमें ही इसके लिए आवाज़ उठानी ही होगी तो आप हमें बताइए कि *---- आख़िर क्या वजहें हैं जिनके कारण हज़ारों गृहणियां हर साल अपनी जान ले लेती हैं? *---- घरेलू हिंसा को रोकने के लिए हमें क्या करना चाहिए ? *---- और क्या आपने अपने आसपास घरेलू हिंसा को होते हुए देखा है ?

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में।