हमारी सूखती नदियां, घटता जल स्तर, खत्म होते जंगल और इसी वजह से बदलता मौसम शायद ही कभी चुनाव का मुद्दा बनता है। शायद ही हमारे नागरिकों को इससे फर्क पड़ता है। सोच कर देखिए कि अगर आपके गांव, कस्बे या शहर के नक्शे में से वहां बहने वाली नदी, तालाब, पेड़ हटा दिये जाएं तो वहां क्या बचेगा। क्या वह मरुस्थल नहीं हो जाएगा... जहां जीवन नहीं होता। अगर ऐसा है तो क्यों नहीं नागरिक कभी नदियों-जंगलों को बचाने की कवायद को चुनावी मुद्दा नहीं बनाते। ऐसे मुद्दे राजनीति का मुद्दा नहीं बनते क्योंकि हम नागरिक इनके प्रति गंभीर नहीं हैं, जी हां, यह नागरिकों का ही धर्म है क्योंकि हमारे इसी समाज से निकले नेता हमारी बात करते हैं।
जय माता दी सेवा समिति की अहम बैठक समिति द्वारा निर्माणाधिन माँ वैष्णो देवी के मंदिर परिसर ( सिंघाडा पोखरा) के कार्यालय में अध्यक्ष राजेश राउत की अध्यक्षता में आयोजित की गई। जिसमें आगामी 13 अप्रैल (शनिवार ) को आयोजित होने वाले विशाल भगवती जागरण की सफलता के मद्देनजर सदस्यगण जुटे और भगवती जागरण की तैयारी से सम्बंधित बातों की चर्चा की गई। साथ ही विभिन्न कार्यों का सदस्यों में प्रभार भी सौपा गया।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ अशोक झा ऑर्गेनिक खेती में बीज और मिट्टी के उपचार सम्बंधित जानकारी दे रहे हैं। सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में।
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिलदेव शर्मा बकरी पालन में टीकाकरण के बारे में जानकारी दे रहे है अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
दोस्तों, हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। अगर आपके पास भी है कोई मज़ेदार चुटकुला, तो रिकॉर्ड करें मोबाइल वाणी पर, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।
हम सभी रोज़ाना स्वास्थ्य और बीमारियों से जुड़ी कई अफवाहें या गलत धारणाएं सुनते है। कई बार उन गलत बातों पर यकीन कर अपना भी लेते हैं। लेकिन अब हम जानेंगे उनकी हकीकत के बारे में, वो भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद से, कार्यक्रम सेहत की सच्चाई में। याद रखिए, हमारा उद्देश्य किसी बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि लोगों को उत्तम स्वास्थ्य के लिए जागरूक करना है। सेहत और बीमारी को लेकर अगर आपने भी कोई गलत बात या अफवाह सुनी है, तो फ़ोन में नंबर 3 दबाकर हमें ज़रूर बताएं। हम अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जानेंगे उन गलत बातों की वास्तविकता, कार्यक्रम सेहत की सच्चाई में।
बनो नई सोच ,बुनो हिंसा मुक्त रिश्ते की आज की कड़ी में हम सुनेंगे महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और हिंसा के बारे में।
थोर यानी केले के पेड़ के तने का बिलकुल अंदर का सफ़ेद नरम हिस्सा। थोर को धोकर बारीख काट ले। थोर में रेशें हो तो उसको काट ते समय हटा दे. थोर को काटके तुरंत पानी में रखे वरना थोर काला पढ़ जायेगा। दूसरे सब्ज़ी में आलू, मूली और कच्चा पपीता को बिलकुल छोटे टुकड़ों में काट ले. थोर २ भाग, आलू १ भाग, पपीता और मूली भी १-१ भाग ले। उड़द दाल के बड़ी को तेल में अच्छे से फ्राई कर ले और उसको छोटे टुकड़ों में तोड़ ले। अब कढ़ाई में थोड़ा सरसो का तेल ले. गरम होने पे उसमे पांच फोरन, तेज पत्ता, और जीरा का तड़का डाले। अब तेल में आलू, पपीता और मूली डालके उसको पकाएँ थोड़ी देर बाद उसमे सवदानुसार नमक और हल्दी डालके २ मिनट पकायें। अब कढ़ाई में कटी हुई थोर को भी डाल दे और 5 मिनट धीमे आँच में अच्छे से पकाएँ। अब इसमें पानी डाले, पानी इतना ही डाले जिससे सरे सब्ज़ी गाल जाए और सूखी सब्ज़ी बन पाए. जब पानी में उबाल आये उसमे फ्राई बड़ी के टुकड़ों को भी डाल दे और सब्ज़ी अच्छे से पकायें। जब सब्ज़ी पक जाए और पानी भी लगभग सूख जाए तब 1 /4 टेबल स्पून चीनी और १ टेबल स्पून घी डाल के मिला ले. गैस बंद सब्ज़ी क ऊपर भुजा हुआ जीरे का पाउडर छिरका दें। थोर घोंटो खाने के लिए तैयार है।
आपका पैसा आपकी ताकत की आज की कड़ी में हम जानेंगे बैंक खाता खुलवाना क्यों जरुरी है। इसके साथ ही सुरक्षित भविष्य के लिए केवल बचत करना काफी नहीं हैं
