अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में एक महिला क्या सोचती है... यह जानना बहुत दिलचस्प है.. चलिए तो हम महिलाओं से ही सुनते हैं इस खास दिन को लेकर उनके विचार!! आप अपने परिवार की महिलाओं को कैसे सम्मानित करना चाहेंगे? महिला दिवस के बारे में आपके परिवार में महिलाओं की क्या राय है? एक महिला होने के नाते आपके लिए कैसे यह दिन बाकी दिनों से अलग हो सकता है? अपने परिवार की महिलाओं को महिला दिवस पर आप कैसे बधाई देंगे... अपने बधाई संदेश फोन में नम्बर 3 दबाकर रिकॉर्ड करें.
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
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विश्व वन्यजीव दिवस जिसे आप वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे के नाम से भी जानते है हर साल 3 मार्च को मनाया जाता है जिसका मुख्य उद्देश्य है की लोग ग्रह के जीवों और वनस्पतियों को होने वाले खतरों के बारे में जागरूक हो इतना ही नहीं धरती पर वन्य जीवों की उपस्थिति की सराहना करने और वैश्विक स्तर पर जंगली जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य या दिवस मनाया जाता है.विश्व वन्यजीव दिवस के उद्देश्य को पूरा करने के लिए है हर वर्ष एक थीम निर्धारित की जाती है जिससे लोगो में इसके प्रति ज्यादा से ज्यादा जागरूकता को बढ़ावा मिले . हर वर्ष की तरह इस वर्ष 2024 का विश्व वन्यजीव दिवस का थीम है " लोगों और ग्रह को जोड़ना: वन्यजीव संरक्षण में डिजिटल नवाचार की खोज" है। "तो आइये इस दिवस पर हम सभी संकल्प ले और वन्यजीवों के सभी प्रजातियों और वनस्पतियों के संरक्षण में अपना योगदान दे।
भुरकुंडा। पटेलनगर भुरकुंडा स्थित जेएम कॉलेज में झारखंड के आदिवासी समाज के विकास में समकालीन अनुसंधान पद्धति का प्रभाव विषय पर चल रहे दो दिवसीय सेमिनार शनिवार को संपन्न हुआ। सेमिनार में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर सह डीन डॉ मिथिलेश कुमार, रामगढ़ कॉलेज की प्राचार्या डॉ रत्ना पांडेय, रामगढ़ कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ रेखा प्रसाद, रामगढ़ कॉलेज के भौतिकी विभागाध्यक्ष सह जेएम कॉलेज के सचिव बक्शी ओमप्रकाश सिन्हा, जेएम कॉलेज के प्राचार्य डॉ विद्यानंद तिवार, झारखंड जनजातीय विकास परिषद के अध्यक्ष सह ओपेन यूनिवर्सिटी के नोडल पदाधिकारी डॉ मनोज अगरिया व डॉ अरविंद सिंह मुख्य रूप से उपस्थित थें। सेमिनार का उद्घाटन मुख्य अतिथि विनोबा भावे विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर सह डीन डॉ मिथिलेश कुमार ने दीप प्रज्जवलित कर किया। सेमिनार को संबोधित करते मुख्य अतिथि डॉ मिथिलेश कुमार ने कहा कि भारतीय समाज जनजातीय समुदाय से आज भी बहुत कुछ ले रहा है। कहने को तो हम स्वयं को प्रगतिशील व आधुनिक कहते हैं, लेकिन असल मायने में हमने जनजातीय समुदाय को कुछ दिया नहीं है। उनकी अपनी एक विशेष जीवनशैली रही है, जो प्रकृति के बेहद करीब है। आज भी जनजातीय समाज पर्यावरण व प्रकृति के लिए स्वयं को उसका संरक्षक मानता है। मूलतः आज के भौतिकवादी व उपभोक्तावादी समाज से उसने स्वयं को दूर रखा है। हालांकि इस समुदाय में भी एक मध्यवर्गीय वर्ग विकसित हो रहा है। लेकिन मूलरूप से आज भी जनजातीय समाज कई त्रुटियों से दूर है। सेमिनार के प्रारंभ में एक टेक्निकल सत्र का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ मनोज कुमार अगरिया ने की। डॉ अगरिया ने कहा कि जनजातीय समाज के लोगों के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार को झारखंड में एसटी कमीशन व आदिम जनजाति आयोग का गठन करने, झारखंड जनजातीय विश्वविद्यालय शुरु करने, झारखंड में बिरहोर, असुर, गौडी भाषा का संरक्षण करने, आदिम जनजातीय समुदाय को लोकसभा व राज्यसभा में आरक्षण देने, झारखंड के सभी विश्वविद्यालय में आरक्षण रोस्टर का पालन करने की आवश्यकता है। सेमिनार के दौरान टूकैन रिसर्च एंड डेवलपमेंट बेंगलुरू के निदेशक केतन मिश्रा के द्वारा सभी लोगों को प्रमाण-पत्र दिया गया। सेमिनार में जेएम काॅलेज के प्रो. डॉ एनके सिंह, डॉ लीला सिंह, डॉ विनोद कुमार सिंह, डॉ शीला सिंह, प्रो सावित्री विश्वकर्मा, डॉ शमा बेगम, डॉ जयदेव सिंह, डॉ वीरेंद्र कुमार सिंह, डॉ नरेंद्र कुमार पाठक, डॉ शिवशंकर सिंह, डॉ रामप्रमोद सिंह, प्रो मनोज कुमार सिंह, प्रो महावीर प्रसाद कुशवाहा, प्रो विपुल कुमार सिंह, प्रो ज्ञानेंद्र दुबे, डॉ नरेंद्र प्रसाद सिंह, प्रो विजय मिश्रा, प्रो अनुज कुमार, डॉ अरुणजय सिंह, डॉ संतोष दांगी, प्रो सुब्रतो घोष, प्रो अवधेश कुमार सिंह, जुबिली कॉलेज भुरकुंडा के प्राचार्य प्रो एनके तिवारी, डॉ विभा राय, डॉ एसएस पांडेय, प्रो सुरेश सिंह, सम्मानित अतिथियों में रामगोपाल अग्रवाल सिहत शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारी व दर्जनों विद्यार्थी मौजूद थें।
