झारखण्ड राज्य के रामगढ ज़िला प्रखंड के ईचारडीह पंचायत से राजकुमार मरांडी ,मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि जितरा टुंगरी में आँगनबाड़ी की व्यवस्था सही नहीं है। कक्ष का स्थिति खंडर की तरह है। पढ़ाई सही से नहीं हो रहा है। बच्चों को सरकारी सुविधा भी सही से नहीं मिल रहा है। वहीं आँगनबाड़ी के बगल में बिजली का खम्बा है जिसमे करंट आ रहा है और हाल ही में एक मवेशी की करंट की चपेट में आने से मौत हुई थी
झारखण्ड राज्य के रामगढ ज़िला से राजू रजवार ,मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि जितरा टुंगरी में आँगनबाड़ी है जिसका भवन नहीं है। बच्चे बहुत कम संख्या में जाते है। पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं है। पढ़ाई के समय सेविका घरेलु कार्य करती है और बच्चों को अपने घर में ही पढ़ाया करती है
झारखण्ड राज्य के रामगढ ज़िला से शीला मरांडी ,मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती है कि जितरा टुंगरी ग्राम में पानी की समस्या है। आँगनबाड़ी की सुविधा भी नहीं है। और बच्चों को पढ़ाने के लिए भी कोई नहीं आता है
झारखण्ड राज्य के रामगढ़ जिला के मांडू प्रखंड जितरातूर गाँव के ईशाडीह पंचायत से धँसो रोजगार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पानी की कमी के कारण ग्रामीणों को गाँव में विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ता है
झारखण्ड राज्य के रामगढ ज़िला के ईचारडीह पंचायत से छाया कुमारी रजवार ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इनके गाँव में पीने के पानी की बहुत समस्या है। जितराटुंडी में भी पानी की समस्या है। चुटुवा नाला से पानी पीने को ग्रामीण विवश है। इनके पंचायत में भी हर घर जल योजना के तहत पानी मिलना चाहिए।
झारखण्ड राज्य के रामगढ ज़िला के ईचारडीह पंचायत से सुनील हेम्ब्रोम ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि इनके गाँव में पीने के पानी की बहुत समस्या है। इन्हे पानी की व्यवस्था चाहिए
बालासोर रेल हादसे में मारे गए करीब 50 लोगों की पहचान अब तक नहीं की जा सकी और उनके शव अब भी भुवनेश्वर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में रखे हुए हैं। इस बीच, भुवनेश्वर नगरनिगम (बीएमसी) ने दो पीड़ितों के अवशेषों का यहां सत्य नगर श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार कर दिया है।एक अधिकारी ने बताया कि एम्स, भुवनेश्वर में हादसे में मारे गए 81 लोगों के शव रखे गए थे जिनमें से 29 शवों की पहचान डीएनए जांच के जरिये की गई।खबर को पूरा सुनने के लिए ऑडियो लिंक पर क्लिक करें.
भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा स्वदेशी प्लेटफॉर्म तकनीक का उपयोग करके ओमिक्रॉन से निपटने के लिए एमआरएनए-आधारित बूस्टर वैक्सीन विकसित की है। इसका विकास जेनोवा बायोफार्मास्यूटिकल्स द्वारा किया गया, इसे जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद द्वारा कार्यान्वित मिशन कोविड सुरक्षा के तहत सहायता दी गई है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
दोस्तों, बहुत दुःख और भारी मन के साथ हम ये बता रहे है कि ग्रामवाणी की प्रखर सामुदायिक संवाददाता सहकर्मी, लखनऊ मोबाइल वाणी की कोऑर्डिनेटर, सामाजिक कार्यकर्ता और हम सब की अज़ीज़ माधुरी चौहान अब इस दुनिया में नहीं रहीं।
भारत की एक बड़ी आबादी को इलाज पर होने वाला खर्च गरीब बना रहा है, खासकर अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में ग्रामीण और शहरी परिवार कर्जदार बन रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज के लिए अस्पताल में होने वाली करीब 14 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में साढ़े आठ प्रतिशत भर्तियों के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है।ज़्यादा जानने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें।
