कच्चे धागों से बनी पक्की डोर है राखी, प्यार और मीठी शरारतों की होड़ है राखी। भाई की लंबी उम्र की दुआ है राखी, बहन के स्नेह का पवित्र प्रतीक है राखी। कलाई पर रेशम का धागा है, बहन ने बड़े प्यार से बांधा है, बहन को भाई से रक्षा का वादा है। दोस्तों ,सावन पूर्णिमा के दिन भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन मनाया जाता है,रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के लिए बेहद ही खास दिन होता है। बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर भारतीय संस्कृति की पहचान कायम करती है, तो भाई बहन को रक्षा करने का वचन देता है। श्रोताओ मोबाइल वाणी परिवार की और से आप सभी को राखी के त्यौहार ढेर सारी शुभकामनाएं !

भारतीय संविधान में भारत को ‘राज्यों के संघ’ के रूप में संबोधित किया गया है। इसके विपरीत संविधान में कहीं भी महासंघ या फेडरेशन (फेडरेशन ) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। संघवाद सत्ता का वह स्वरूप है जहां सत्ता एक से ज्यादा स्तरों पर बटी होती है। भारत में यही व्यवस्था है, और इसी के चलते यहां सत्ता का बंटवारा केंद्र और राज्य के स्तर पर किया गया है। सहकारी संघवाद में केंद्र व राज्य एक-दूसरे के संबंधों में एक-दूसरे के सहयोग से अपनी समस्याओं को हल करने का प्रयास करते हैं। सहकारी संघवाद की इस अवधारणा में यह स्पष्ट किया जाता है कि केंद्र और राज्य में से कोई भी किसी से श्रेष्ठ नहीं है।

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अभी हाल में ही सांख्यिकी और कार्यक्रम मंत्रालय, भारत सरकार ने जुलाई महीने का नया आकंड़ा ज़ारी किया है। इस आंकड़े के अनुसार , सब्जियों और अन्य खाने का सामान महंगा होने से खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में 7.44 प्रतिशत पर पहुंच गई है , जो कि पिछले 15 महीनो में सबसे ज्यादा है। मतलब कि जुलाई महीने में पिछले डेढ़ साल की सबसे ज्यादा महँगाई थी। लेकिन क्या कभी आपने किसी नेता का बढ़ती महँगाई पर बयान सुना। पहले टमाटर महँगा था तो उसे छोड़ने के लिए बोला गया। अब कुछ दिन में आटा और दाल खाने के लिए भी मना किया जाएगा। उसके बाद हम लोग हवा पीकर न्यू इंडिया को बनाने में अपना योगदान देंगे। कौन जाने ...? बाकि लाल किले की प्राचीर से आपने देश के प्रधानमंत्री का भाषण सुन ही लिया होगा। सरकार ने तो पहले से ही कह दिया था कि जो सत्तर साल में नहीं हुआ, उसे ही कर के दिखाएंगे और एकदम नया इंडिया बनाएंगे। तो वो तो बन ही रहा है। एक दम से रिन जैसा सफ़ेद। बाकि आप बताईये दोस्तों, आपके क्षेत्र में महंगाई के क्या हालात है ? इस बढ़ती हुयी महँगाई ने आपके और आपके परिवार में खान पान को किस तरह से प्रभावित किया है ? आने वाले वक़्त में आप किन-किन मुद्दों पर बात करना चाहते है ? और आपको राजीव की डायरी कैसी लग रही है। अपनी बात बताने के लिए अभी दबाएँ अपने फ़ोन में नंबर 3 का बटन और बताएं अपने विचार।

नमस्कार आदाब श्रोताओं, मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है रोजगार समाचार। यह नौकरी उन लोगों के लिए है जो इंडियन एयर फोर्स रैली भर्ती, द्वारा निकाली गई Airmen (Group Y) पदों पर Rs.26,900/- प्रतिमाह रहेगा, पर कार्य करने के लिए इच्छुक है । कुल 100 पदों के लिए वैसे उम्मीदवार आवेदन कर सकते है जिन्होंने भौतिकी , रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और अंग्रेजी के साथ 12वीं / इंटरमीडिएट परीक्षा में कम से कम 50% अंकों के साथ पास किया हो। आवेदन करने के लिए 26-12-2002 और 26-12-2006 के बीच जन्मे उम्मीदवार ही पात्र होंगे।

राजनीति तय करती है कि समाज की दशा और दिशा क्या होगी, राजनीति यह भी तय करती है कि देश का भविष्य क्या होगा? इसे समाज का अगुआ माना जाता है। इसलिए राजनीति कभी हल्के उद्देश्यों के साथ नहीं की जाती, और यह देश के सबसे बड़े पद पर बैठे लोगों से जुड़ी हो तो उनसे और अतिरिक्त गंभीरता और सतर्कता की उम्मीद की जाती है। राजनीति और देश के भविष्य की गंभीरता को महान समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया बेहतर ढंग से समझाते हुए कहते हैं कि “जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करतीं।” लोहिया जब वे यह बात कह रहे थे उस समय देश में नेहरू जैसा महान व्यक्ति देश का नेतृत्व कर रहा था।

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Aug. 24, 2023, 5:24 p.m. | Location: 2168: Madhya Pradesh, Guna, NOT KNOWN | Tags: song  

सरकार और जनता का आपस में सहयोग का संबंध होता है, सरकार हमें सुविधा देती है और हम, बदले में टैक्स। यह संबंध अब टूट रहे हैं, कारण कि सरकार ने हमें दी वाली सुविधाओं को ‘रेवड़ी’ कहना शुरु कर दिया है। सरकार का कहना है कि सुविधाएं चाहिए तो पैसा दीजिए, लेकिन अगर पैसा देकर ही सब कुछ ही मिलेगा तो फिर सरकार किस लिए है?

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सरकार कानून की किताब में बदलाव कर रही है, इसके लिए देश की संसद में बिल पेश कर दिया गया है। इसको बदलने का कारण अंग्रेजों द्वारा बनाया जाना है, लेकिन सब कुछ करने के बाद इससे हमारे-आपके जीवन में क्या बदलाव आएगा यह सवाल अभी से उठना शुरू हो गया है?

जलवायु की पुकार [श्रोताओं की सरगम] कार्यक्रम के अंतर्गत हम जानेंगे अलग अलग लोगों के योगदान के बारे में की कैसे पर्यावरण के समस्याओं का समाधान निकाला जा सके।