उत्तरप्रदेश राज्य के कौशाम्बी ज़िला से ओम प्रकाश ,मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि प्राइमरी स्कूलों में अच्छे से पढ़ाई नहीं होती है। शिक्षा यूँही बैठे रहते है। खाना भी अच्छा नहीं मिलता है। शिक्षकों पर कड़ी कार्यवाई होनी चाहिए

उत्तर प्रदेश राज्य के जिला हरदोई से मोबाइल वाणी के माध्यम से मुकेश बोल रहें हैं की जनसंख्या महिला पर निर्भर है। इसलिए महिलाओ को बढ़ावा दे और उनका सम्मान करें

बेटों की चाह में बार-बार अबॉर्शन कराने से महिलाओं की सेक्शुअल और रिप्रोडक्टिव लाइफ पर भी बुरा असर पड़ता है। उनकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ भी खराब होने लगती है। कई मनोवैज्ञानिको के अनुसार ऐसी महिलाएं लंबे समय के लिए डिप्रेशन, एंजायटी का शिकार हो जाती हैं। खुद को दोषी मानने लगती हैं। कुछ भी गलत होने पर गर्भपात से उसे जोड़कर देखने लगती हैं, जिससे अंधविश्वास को भी बढ़ावा मिलता है। तो दोस्तों आप हमें बताइए कि * -------आखिर हमारा समाज महिला के जन्म को क्यों नहीं स्वीकार पाता है ? * -------भ्रूण हत्या और दहेज़ प्रथा के आपको क्या सम्बन्ध नज़र आता है ?

उत्तरप्रदेश राज्य के कौशाम्बी ज़िला से ओम प्रकाश ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि इनके गाँव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई अच्छे से नहीं होती है। खाना भी सही से नहीं बनाया जाता है। शिकायत करने पर रसोइयों पर कोई कार्यवाई नहीं की जाती है

दहेज में परिवार की बचत और आय का एक बड़ा हिस्सा खर्च होता है. वर्ष 2007 में ग्रामीण भारत में कुल दहेज वार्षिक घरेलू आय का 14 फीसदी था। दहेज की समस्या को प्रथा न समझकर, समस्या के रूप में देखा जाना जरूरी है ताकि इसे खत्म किया जा सके। तो दोस्तों आप हमें बताइए कि *----- दहेज प्रथा को लेकर आपके क्या विचार है ? *----- आने वाली लोकसभा चुनाव में दहेज प्रथा क्या आपके लिए मुद्दा बन सकता है ? *----- समाज में दहेज़ प्रथा रोकने को लेकर हमें किस तरह के प्रयास करने की ज़रूरत है और क्यों आज भी हमारे समाज में दहेज़ जैसी कुप्रथा मौजूद है ?

मध्यप्रदेश राज्य के पन्ना ज़िला से हमारे श्रोता ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि सरकारी स्कूल में शिक्षा अच्छे से नहीं दी जाती है। इनके ग्राम में शिक्षा में सुधार नहीं हुआ है। कभी स्कूल होती है तो कभी नहीं होती है

भारत में शादी के मौकों पर लेन-देन यानी दहेज की प्रथा आदिकाल से चली आ रही है. पहले यह वधू पक्ष की सहमति से उपहार के तौर पर दिया जाता था। लेकिन हाल के वर्षों में यह एक सौदा और शादी की अनिवार्य शर्त बन गया है। विश्व बैंक की अर्थशास्त्री एस अनुकृति, निशीथ प्रकाश और सुंगोह क्वोन की टीम ने 1960 से लेकर 2008 के दौरान ग्रामीण इलाके में हुई 40 हजार शादियों के अध्ययन में पाया कि 95 फीसदी शादियों में दहेज दिया गया. बावजूद इसके कि वर्ष 1961 से ही भारत में दहेज को गैर-कानूनी घोषित किया जा चुका है. यह शोध भारत के 17 राज्यों पर आधारित है. इसमें ग्रामीण भारत पर ही ध्यान केंद्रित किया गया है जहां भारत की बहुसंख्यक आबादी रहती है.दोस्तों आप हमें बताइए कि *----- दहेज प्रथा को लेकर आप क्या सोचते है ? और इसकी मुख्य वजह क्या है ? *----- समाज में दहेज़ प्रथा रोकने को लेकर हमें किस तरह के प्रयास करने की ज़रूरत है ? *----- और क्यों आज भी हमारे समाज में दहेज़ जैसी कुप्रथा मौजूद है ?

दिल्ली से जगजीवनलाल जयसवाल ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि दिल्ली में ही केवल नहीं बल्कि कही भी महिलाएँ ,पुरुष ,विकलांग ,गरीब सुरक्षित नहीं है।

दोस्तों, यह साल 2024 है। देश और विश्व आगे बढ़ रहा है। चुनावी साल है। नेता बदले जा रहे है , विधायक बदले जा रहे है यहाँ तक की सरकारी अधिकारी एसपी और डीएम भी बदले जा रहे है। बहुत कुछ बदल गया है सबकी जिंदगियों में, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा आज भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है। देश की सरकार तो एक तरफ महिला सशक्तिकरण का दावा करती आ रही है, लेकिन हमारे घर में और हमारे आसपास में रहने वाली महिलाएँ आखिर कितनी सुरक्षित हैं? आप हमें बताइए कि *---- समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हमें किस तरह के प्रयास करने की ज़रूरत है ? *---- महिलाओं को सही आज़ादी किस मायनों में मिलेगी ? *---- और घरेलू हिंसा को रोकने के लिए हमें क्या करना चाहिए ?

उत्तरप्रदेश राज्य के सुल्तानपुर जिला से रख्रूद्दीन खान ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि आज कल महिलाएं घरेलु हिंसा के कारण ज्यादातर आत्महत्या का सहारा लेती है। इसके रोकथाम के लिए महिलाओं को घरेलु हिंसा के कानून की जानकारी को होनी चाहिए